श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)

श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)
Srimad Ananda Ramayana Hindi
महर्षि वाल्मीकि / अज्ञात द्वारा
स्रोत: Srimad Ananda Ramayana Complete 9 Kandas with Hindi Translation (उद्गम)
DevanagariHindipublished811 पृष्ठ
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१६ विषयानुक्रमणिका
| विषय | पृष्ठ | विषय | पृष्ठ |
|---|---|---|---|
| दण्ड देनेके लिए कहना और कुत्तेका संन्यासीको कहींका मठाधीश बनानेका दण्ड देना | ४४१ | उनका कारुणिक भारीपीत सुनकर रामका प्रकट होना और वरदान देना | ४६० |
| इस दण्डपर चकित लोगोंका कुत्तेसे कारण पूछना और उसका बतलाना, एक दिन एक विप्रका अपने मरे हुए बच्चेको लेकर रामके समक्ष आना और रोना | ४४४ | उन सबको साथ लेकर विप्रका लक्ष्मण आदिके पास आना और वहाँसे एक सरोवरपर पहुँचना | ४६१ |
| रामका उसे आश्वासन देना और बच्चेके शवको तैलकी द्रोणमें रखवाना | ४४५ | ऋषिके समक्ष रामका वाराहमृगवध करना | ४६१ |
| उसी समय शृङ्गवेरपुरसे एक और शवका आना | ४४६ | वहाँसे रामका मथुरा जाना, वहाँ एकान्तमें रामके पास रात्रिमें नारीरूप धारण करके यमुनाका आगमन | ४६३ |
| उसकी विधवाको सांत्वसन देकर रामका पुष्पक विमानपर चढ़कर बाहर निकलना, उनके चले जानपर और पांच शवांका अयोध्या आना | ४४७ | कालिन्दी (यमुना) को राम वरदान | ४६४ |
| रामका दण्डकवनमें एक शूद्रको उग्र तप करते देखना, उससे बात करना और वधदान देना | ४४८ | ### राज्यकाण्ड (उत्तरार्द्ध)<br>त्रयोदश सर्ग<br>सभामें बैठे हुए रामका एक मनुष्यको हँसो सुनकर घबराना | ४६५ |
| रामके समक्ष एक गृध्र और उलूकका अभियोग तथा रामका न्याय | ४४९ | रामका अपने राज्यमें हँसनेकी मनाही करना | ४६६ |
| रामका पूर्वोक्त सातों मृतकोंको जीवित करना | ४५० | रामके इस आदेशसे मनुष्यों तथा देवताओंमें आतंक छा जाना और विरोध-प्रदर्शनार्थ ब्रह्माका अयोध्याके एक पीपल वृक्षमें प्रविष्ट होकर जोरोंसे हँसना | ४६७ |
| ### एकादश सर्ग<br>मृगयाके लिए रामकी यात्रा और | ४५० | एक दिन सभामें किसी दूतको हँसते देखकर रामका हँसना और बादमें पछतात हुए अपनी हँसीपर विचार करना | ४६८ |
| ऋतुवर्णन | ४५१ | कारण ज्ञात होनेपर अनुचरोंको हँसनेवाला पीपल काट डालनेकी आज्ञा देना, उसे काटनेको गये हुए देवोंका ब्रह्माकी आज्ञावशसे व्याहृत होकर चीत्कार करना | ४६८ |
| रामका एक मृगका पीछा करते हुए अपने साथियोंसे बिछुड़कर वनमें दूर निकल जाना वहाँ सिंहको मारना और मृत मृगका अपनी आहरणपर सुलाना | ४५३ | बादमें रामकी आज्ञासे सुग्रीवका जाना, वहाँ पत्थरोंको मारते उनका भी मूर्छित होना और रामका वसिष्ठजी बुलाकर कारण पूछना | ४६९ |
| रामका एक कान्तारमें घुसना, वहाँ चार स्त्रियोंका मृतप्राय दशामें देखना और उन्हें जीवित करना | ४५२ | वसिष्ठका कारण बतलाना, ब्रह्माकी धृष्टता सुनकर रामका कुपित होना और क्रुद्ध रामको वहाँपर वाल्मीकिका समझाना | ४७० |
| रामका उन स्त्रियोंसे वार्तालाप, उनका रामपर मोहित होना और उनको रामका वर देना | ४५३ | आनन्दरामायणकी महिमा | ४७१ |
| ### द्वादश सर्ग<br>उन चारोंके साथ आगे चलकर एक स्थानपर रामका सोलह हजार स्त्रियोंको देखना | ४५५ | वाल्मीकिका ब्रह्माको बुलवाना | ४७२ |
| उन सब स्त्रियोंका रामपर मोहित होना | ४५६ | ब्रह्माका रामकी स्तुति करना और वसिष्ठका मेरे त्रिगुणोंके विषयमें प्रश्न | ४७३ |
| उन सबका वरण करनेके लिए रामको विवश करना और रामका असमर्थान होना | ### चतुर्दश सर्ग<br>वसिष्ठके प्रश्नका ब्रह्मा द्वारा उत्तर, वश्विनो- | ||
| रामके वियोगमें उन स्त्रियोंकी करुणावस्थाका वर्णन | ४५८ | कुमारोंका विष्णुके गण जय-विजयको शाप देना और |