भारतकोश
श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)

श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)

Srimad Ananda Ramayana Hindi

महर्षि वाल्मीकि / अज्ञात द्वारा

स्रोत: Srimad Ananda Ramayana Complete 9 Kandas with Hindi Translation (उद्गम)

DevanagariHindipublished811 पृष्ठ

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२० विषयानुक्रमणिका


विषयपृष्ठविषयपृष्ठ
दिक्पोके लिए कुछ उपयोगी फल७२१ब्रह्माका सोमवंशी राजाओंको साथ लेकर रामके पास जाना और क्षमा मँगवाना७७१
रामनामस्तोत्रकी स्वरूपविधि७२३रामका ब्रह्माको वाल्मीकिके पास भेजना और वाल्मीकिके परामर्शसे सोमवंशी राजाओंकी स्त्रियोंका सीताके पास जाना७७२
पंचदश सर्गसीताके अनुरोधपर युद्धविराम, ब्रह्माका रामसे वैकुण्ठधाम पधारनेकी प्रार्थना करना और रामकी स्वीकृति७७३
लक्ष्मणकवच७२५पञ्चम सर्ग
भरतकवच७२७रामको परम धाम जानेके लिये उद्यत देखकर हरण, सुग्रीव, विभीषण आदिका अपने साथ ले चलनेके लिये आग्रह करना७७४
शत्रुघ्नकवच७२९यज्ञमें आए हुए राजाओं, मित्रो तथा पुत्रोकी विदाई और उनकी स्थान स्थानपर नियुक्ति७७५
मनन एवं कीर्तन करने योग्य राममन्त्र७३१रामके आज्ञानुसार कुशका अयोध्या आना७७६
षोडश सर्गरामका लक्ष्मणको वरदान७७७
रामायणश्रवणके बादके कर्त्तव्य७३८षष्ठ सर्ग
गरुड़की शंका और रामके द्वारा समाधान७३९दूसरे दिन सवेरे रामका नजलोकोंको बुलाकर अपने परम धाम आनेकी बात बतलाना७७८
वानरोंकी उत्पत्तिका इतिहास और वानरोंको वरदान७४०रामके आगमनकी बात जानकर स्वर्गके देवताओंमें उत्साहका सञ्चार७७९
हनुमन्तसाकारोपासनविधि७४१सौमित्रिका रामके समक्ष स्तुति करना७८०
सप्तम सर्गगरुड़पर बैठकर रामका वैकुण्ठधाममें जाना और रामके साथ गये सभी अयोध्यावासियोंको सान्तानिक लोक प्राप्त होना७८१
श्रीरामचन्द्रीयादि साररामायण७४३सप्तम सर्ग
अष्टादश सर्गकुशके बादवाले सूर्यवंशी राजाओंकी वंशावली७८२
अर्जुनके कपिध्वज नाम पड़नेका कारण७५१अन्य रामायणों तथा आनन्दरामायणमें भेदका कारण७८३
पूर्णकाण्ड<br>प्रथम सर्गअष्टम सर्ग
रामकी सभामें हस्तिनापुरसे दूतका आना७५७विष्णुदासका रामदाससे आनन्दरामायणकी अनुक्रमणिका पूछना और रामदासका अनुक्रमणिकासूत्र कहना७८४
वाल्मीकिका रामको चन्द्रवंशी राजाओंका इतिहास सुनाना७६०नवम सर्ग
द्वितीय सर्गआनन्दरामायण सुननेका फल७८८
रामका सामन्त राजाओंको बुलवाना७६१अनुष्ठानविधि७८९
रामका भरतको मण्डोपाधिके पदपर अभिषेक करनेका सङ्कल्प करना, किन्तु भरतका यह पद स्वीकार न करना जिससे उस पदपर कुशका अभिषेक७६२पारायणविधि७९०
हस्तिनापुरीपर चढ़ाईके लिये परामर्श, रामका शरयू और अयोध्याको वरदान७६४आनन्दरामायणका संक्षिप्त माहात्म्य७९२
रामका हस्तिनापुरको प्रस्थान७६५पार्वतीजी और शिवजीका रामदास-विष्णुदासके विषयमें प्रश्नोत्तर७९३
तृतीय सर्ग
रामका हस्तिनापुर पहुँचना७६६
राम और सोमवंशी राजाओंका युद्ध७६७
उस भीषण युद्धको देखकर देवताओंमें घबराहट और शान्तिका उपाय सोचना७६८
चतुर्थ सर्ग
कुशका ब्रह्मास्त्र संधान करना और ब्रह्माका आकर रोकना७७०

इति आनन्दरामायणविषयानुक्रमणिका समाप्त