भारतकोश
श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)

श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)

Srimad Ananda Ramayana Hindi

महर्षि वाल्मीकि / अज्ञात द्वारा

स्रोत: Srimad Ananda Ramayana Complete 9 Kandas with Hindi Translation (उद्गम)

DevanagariHindipublished811 पृष्ठ

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पृष्ठ 385

सर्गः ७ ] विवाहकाण्डम् २६९


लक्ष्मस्याथांगदस्यापि विवाहौ तैर्विनिश्चितौ । ज्योतिर्विद्भिर्गतेऽह्ने वैशाखे राघवाग्रतः ॥४३॥
चित्रकेतोः पुष्करस्य विवाहौ तैर्विनिश्चितौ । ज्येष्ठे मासि क्रमेणैव पक्षे पक्षे पृथक् पृथक् ॥४४॥
तक्षस्याथ सुबाहोश्च विवाहौ मार्गशीर्षके । पक्षान्तरेण रामाग्रे ज्योतिर्विद्भिर्विनिश्चितौ ॥४५॥
यूपकेतोर्भदस्य चित्रकेतोर्वि निश्चिताः । माघमासे विवाहाश्च ज्योतिःशास्त्रविशारदैः ॥४६॥
पुष्करस्याथ तक्षस्य सुबाहोः फाल्गुने शुभे । विवाहा निश्चिताः पूर्वं रामाग्रे गणकैस्तदा ॥४७॥
एवं निश्चिताः सर्वे विवाहा द्वादश क्रमात् । ज्योतिर्विद्भिर्निश्चितांश्च श्रुत्वा तानर्चयद्विभुः ॥४८॥

इति श्रीमत्कोटिरामचरितान्तर्गते श्रीमदानन्दरामायणे वाल्मीकीये विवाहकांडे
द्वादशविवाहलग्निर्निश्चयो नाम षष्ठः सर्गः ॥ ६ ॥


सप्तमः सर्गः

( नागों तथा गंधर्वराजकी कन्याओंका विवाह )

श्रीरामदास उवाच
अथ ते गणकाः सर्वे वसिष्ठस्तत्पुरोधसः । कुमारीणां विभागार्थं चक्रुः श्रीराघवाग्रतः ॥ १ ॥
कञ्जाननां लक्ष्मणाथ कञ्जाक्षीमंगदाय च गणका निश्चयं चक्रुः कञ्जांघ्रीं चित्रकेतवे ॥ २ ॥
कलावतीं पुष्कराय तथा तक्षाय कालिकाए सुबाहवे च कमलां मालतीं यूपकेतवे ॥ ३ ॥
गणकैः सप्त ता एव नागकन्या विनिश्चिताः । चंद्रिकामंगदायाथ चंद्रास्यां चित्रकेतवे ॥ ४ ॥
चञ्चलाख्यां पुष्कराय तक्षाय चपलां तथा । सुबाहवे तु अचलां प्रोचुस्ते गणकादयः ॥ ५ ॥
एवं गंधर्वकन्यास्ताः पंच विप्रैर्विनिश्चिताः । एवं हि निश्चयं कृत्वा गणकादीन् रघूत्तमः ॥ ६ ॥
विसृज्य मैथिलीं गत्वा सर्वं वृत्तं न्यवेदयत् । ततो ययुः कोटिसंख्ये पार्थिवाश्च मुनीश्वराः ॥ ७ ॥
सप्तद्वीपांतरस्थाश्च सावशेषाः समलकाः । नानावाहनसंस्थाश्च पौरैर्जानपदैर्निजैः ॥ ८ ॥


मुहूर्त मार्गशीर्षमें तीन मुहूर्त माघमें और तीन ही मुहूर्त फाल्गुनमें बतलाया । इस तरह उन बारहौ कन्याओंके विवाहका लग्न बन गया । तदनन्तर वसिष्ठके साथ-साथ उन ज्योतिर्विदों ने वैशाखवाली लग्नमें लक्ष्मण और अङ्गदके विवाहका मुहूर्त निश्चित किया । चित्रकेतु और पुष्करका विवाह ज्येष्ठमासकी लग्नपर निश्चित हुआ । तक्ष और सुबाहुका विवाह एक पक्ष बाद मार्गशीर्षके ही पक्षमें निश्चित किया ॥ ४२-४५ ॥ यूपकेतु, अङ्गद तथा चित्रकेतुका विवाह माघ मासमें निश्चित हुआ ॥ ४६ ॥ पुष्कर, तक्ष तथा सुबाहुका विवाह रामके समक्ष बैठे हुए ज्योतिर्विदों ने फाल्गुन मासकी शुभ लग्नमें निश्चित किया ॥ ४७ ॥ इस तरह क्रमशः बारहौ विवाहोंके निश्चित हो जानेपर रामने ज्योतिर्विदोंकी विधिवत् पूजा की ॥ ४८ ॥ इति श्रीमत्कोटिरामचरितान्तर्गते श्रीमदानंदरामायणे पं० रामतेजपाण्डेयविरचितभाषाटीकासहिते विवाहकाण्डे षष्ठः सर्गः ॥ ६ ॥

श्रीरामदास कहने लगे - उपर्युक्त प्रकारसे विवाह निश्चित हो जानेपर रामके सामने ही वसिष्ठ तथा ज्योतिर्विदों ने उन कन्याओंका विवाह तय करनेके उद्देश्यसे विचार किया कि कौन-सी कन्या किसको दी जाय ॥ १ ॥ कञ्जानना नामकी कन्या लक्ष्मणके लिए, कञ्जाक्षी अंगदके लिए, कञ्जांघ्री चित्रकेतुके लिए, कलावती पुष्करके लिए, कालिका तक्षके लिए, कमला सुबाहुके लिए और मालती यूपकेतुके लिए देना निश्चित हुआ ॥ २ ॥ ३ ॥ इस प्रकार ज्योतिर्विदों ने इन सब कन्याओंको देखकर निश्चय कर दिया । चंद्रिका अङ्गदके लिए, चंद्रास्या चित्रकेतुके लिए, चंचला पुष्करके लिए, चपला तक्षके लिए और अचला सुबाहुके लिए देनेके लिए उन ज्योतिर्विदों ने निश्चित किया । इस तरह उन पाँचों गन्धर्वकन्याओंका वरका निश्चय हो जानेपर रामने आदरपूर्वक ज्योतिर्विदोंको विदा किया और स्वयम् सीताके पास जा पहुंचकर जो कुछ सभा में निश्चित हुआ था, सो उन्हें कह सुनाया । इसके बाद सातों द्वीपोंमें रहनेवाले करोड़ों मुनीश्वर तथा राजे अपने परिवार और प्रजा समेत नाना प्रकारकी सवारियोंपर सवार होकर अयोध्या आये ॥ ४-८ । उस समय उन लोगोंसे सारी अयोध्या भर