भारतकोश
आनन्दमठ (वन्दे मातरम् एवं संन्यासी विद्रोह इतिहास)

आनन्दमठ (वन्दे मातरम् एवं संन्यासी विद्रोह इतिहास)

Anandamath with Vande Mataram - Bankim Chandra

बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय द्वारा

DevanagariHindipublished78 पृष्ठ

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सुहासिनी सुमधुरभाषिणीम् सुखदां वरदां मातरम् । ''..... महेद्र बोले-‘ ‘यह तो देश है, यह तो मां नही है। ’’ भवानंद ने कहा-‘ ‘हमलोग दूसरी किसी मां को नही मानते। ‘जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी’- हमारी माता, जन्मभूमि ही हमारी जननी है- हमारे न मां है, न पिता है, न भाई है- कुछ नही है, स्त्री भी नही, घर भी नही, मकान भी नही, हमारी अगर कोई हैं तो वही सुजला, सुफला, मलयजसमीरण-शीतला, शस्यश्यामला.....’’ अब महेंद्र ने समझकर कहा-‘ ‘तो फिर गाओ !’’ भवानंद फिर गाने लगे- ‘‘वन्दे मातरम् ! सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम शस्यश्यामलां मातरम्............।’’ ‘‘शुभ्र ज्योत्स्ना-पुलकित यामिनीम् फुल्लकुसुमित द्रुमदलशोभिनीम् सुहासिनी सुमधुरभाषिणीम् सुखदां, वरदां मातरम् ।। वन्दे मातरम्......... सप्तकोटिकण्ठ-कलकल निनादकराले, द्विसप्तकोटि भुजैर्धृत खरकरवाले, अबला केनो मां तुमि एतो बले ! बहुबलधारिणीम् नमामि तारिणीम् रिपुदलवारिणीम् मातरम् ॥ वन्दे........ तुमी विद्या, तुमी धर्म, तुमी हरि, तुमी कर्म, त्वं हि प्राण : शरीरे। बाहुते तुमी मां शक्ति, हृदये तुमी मां भक्ति, तोमारई प्रतिमा गड़ी मन्दिरे-मन्दिरे। त्वं हि दुर्गा दशप्रहरण धारिणी, कमला कमल-दल-विहारिणी, वाणी विद्यादायिनी नमामि त्वं नमामि कमलां, अमलां, अतुलाम, सुजलां, सुफलां, मातरम् वन्दे मातरम् ॥ श्यामलां, सरलां, सुस्मितां, भूषिताम् धरणी, भरणी मातरम् ॥ वन्दे मातरम्...’’

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