भारतकोश
अष्टाङ्गहृदयम्

अष्टाङ्गहृदयम्

Ashtanga Hridayam

श्रीमद्वाग्भट द्वारा

स्रोत: चौखम्बा संस्कृत प्रतिष्ठान - निर्मला हिन्दी व्याख्या (डॉ० ब्रह्मानन्द त्रिपाठी) · चौखम्बा संस्कृत प्रतिष्ठान, दिल्ली · 1999 (उद्गम)

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विषयानुक्रमणिका

सूत्रस्थानम्

विषयपृष्ठांकविषयपृष्ठांक
( १ ) आयुष्कामीयाध्यायःरोग की परीक्षा१८
मंगलाचरणदेश-भेदों का वर्णन१८
आयुर्वेद का प्रयोजनभूमिदेश का वर्णन१९
आयुर्वेदावतरणकाल के भेद१९
अष्टांगहृदय का स्वरूपऔषध के भेद२०
आयुर्वेद के आठ अंगशारीरिक दोषों की चिकित्सा२०
दोषों का वर्णनमानसिक दोषों की चिकित्सा२०
विकृत-अविकृत दोषचिकित्सा के चार पाद२०
दोषों के स्थान एवं प्रकोपकालवैद्य के चार लक्षण२१
वय आदि के अनुसार कालऔषध-द्रव्य के चार लक्षण२१
दोषों का अग्नि पर प्रभावपरिचारक ( उपस्थाता ) के चार लक्षण२१
दोषों का कोष्ठ पर प्रभावरोगी के चार लक्षण२१
दोषों से गर्भप्रकृति का वर्णन१०साध्य-असाध्य के अनुसार व्याधि के भेद२२
वातदोष के गुण१०सुखसाध्य रोग के लक्षण२२
पित्तदोष के गुण१०कष्टसाध्य रोग के लक्षण२३
कफदोष के गुण११याप्य रोग के लक्षण२३
संसर्ग-सन्निपात परिभाषा११प्रत्याख्येय रोग के लक्षण२३
धातुओं का वर्णन११त्याज्य रोगी२३
मलों का वर्णन११अध्याय-संग्रह वर्णन२४
दोष, धातु, मलों की वृद्धि एवं क्षय१२सूत्रस्थान के अध्याय२४
रसों का वर्णन१२शारीरस्थान के अध्याय२४
रसों का वात आदि पर प्रभाव१३निदानस्थान के अध्याय२४
द्रव्य का वर्णन१३चिकित्सास्थान के अध्याय२५
वीर्य का वर्णन१४कल्प-सिद्धिस्थान के अध्याय२५
विपाक का वर्णन१४उत्तरस्थान के अध्याय२५
द्रव्य के गुणों का वर्णन१५अष्टांगहृदय के छः स्थान२५
रोग एवं आरोग्य के कारण१५( २ ) दिनचर्याध्यायः
रोग-आरोग्य में भेद१६ब्राह्ममुहूर्त में जागना२६
रोगों के दो भेद१६दत्तवन का विधान२६
दो प्रकार के रोगाधिष्ठान१७दत्तवन करने की विधि२७
मानसिक दोषों का परिचय१७दत्तवन का निषेध२७
रोगी की परीक्षा१७अञ्जन-प्रयोग२८

२ अ० भू०