अष्टाङ्गहृदयम्

अष्टाङ्गहृदयम्
Ashtanga Hridayam
by श्रीमद्वाग्भट
Source: चौखम्बा संस्कृत प्रतिष्ठान - निर्मला हिन्दी व्याख्या (डॉ० ब्रह्मानन्द त्रिपाठी) · चौखम्बा संस्कृत प्रतिष्ठान, दिल्ली · 1999 (origin)
DevanagariSanskritpublished387 pages
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| विषय | पृष्ठांक | विषय | पृष्ठांक |
|---|---|---|---|
| अन्य आचार्यों का मत | २३६ | वमन आदि में कालनिर्देश | २४२ |
| बस्तिद्रव्य-मिश्रणविधि | २३६ | बस्ति द्वारा दोषनिर्हरण | २४३ |
| निरुहण का पश्चात्कर्म | २३६ | बस्तिप्रयोग की प्रशंसा | २४३ |
| बस्ति के लौटने की अवधि | २३६ | सिरावेध का महत्त्व | २४३ |
| अनेक बस्ति-प्रयोग | २३६ | ( २० ) नस्यविधिरध्यायः | |
| सम्यग्योग आदि का संकेत | २३७ | नस्य का वर्णन | २४४ |
| सम्यग्योग में पश्चात् कर्म | २३७ | नस्यकर्म के भेद | २४४ |
| विकारों का शमन | २३७ | विरेचननस्य का प्रयोग | २४४ |
| पुनः अनुवासन-प्रयोग | २३७ | बृंहणनस्य का प्रयोग | २४५ |
| अनुवासन के विविध योग | २३७ | शमननस्य का प्रयोग | २४५ |
| सम्यग्योग का वर्णन | २३७ | विरेचननस्य के द्रव्य | २४५ |
| दोषानुसार बस्तिसंख्या | २३७ | बृंहणनस्य के द्रव्य | २४५ |
| आहार-विधान | २३८ | शमननस्य के द्रव्य | २४५ |
| वातदोष में बस्तिप्रयोग | २३८ | नस्य के भेद | २४५ |
| पित्तदोष में बस्तिप्रयोग | २३८ | नस्य-प्रयोगविधि | २४५ |
| कफदोष में बस्तिप्रयोग | २३८ | नस्य की मात्रा | २४६ |
| सन्निपात में बस्तिप्रयोग | २३८ | नस्य के अयोग्य व्यक्ति | २४६ |
| तीन ही बस्तियाँ | २३८ | नस्य के योग्य समय | २४६ |
| बस्तिनाम-भेद | २३८ | रोगानुसार नस्य-प्रयोग | २४६ |
| उक्त मतों की प्रामाणिकता | २३८ | नस्यसेवन की सीमा | २४६ |
| बस्तिकर्म की अवधि | २३८ | नस्य का पूर्वकर्म | २४७ |
| बस्तिकर्म का वर्णन | २३९ | नस्य-प्रयोगविधि | २४७ |
| बस्तिकाल का वर्णन | २३९ | मूच्छाशान्ति की विधि | २४७ |
| बस्तियोग का वर्णन | २३९ | स्नेहनस्य-प्रयोग | २४७ |
| स्नेह एवं निरुहण प्रयोग | २३९ | नस्यप्रयोग की प्रतीक्षा | २४७ |
| बस्तियों का प्रयोगक्रम | २३९ | धूमपान-प्रयोग | २४७ |
| बस्ति की त्रिदोषनाशकता | २३९ | स्नेहननस्य का सम्यग्योग | २४८ |
| मात्राबस्ति का वर्णन | २३९ | लूक्षनस्य का हीनयोग | २४८ |
| मात्राबस्ति-सेवन | २४० | स्नेहननस्य का अतियोग | २४८ |
| मात्राबस्ति की विशेषता | २४० | विरेचननस्य का सम्यग्योग | २४८ |
| उत्तरबस्ति का वर्णन | २४० | मिथ्यायोग, हीनयोग के लक्षण | २४८ |
| उत्तरबस्ति में नेत्र का प्रमाण | २४० | प्रतिमर्शनस्य-प्रयोग | २४८ |
| स्नेहमात्रा का प्रमाण | २४० | प्रतिमर्शनस्य का निषेध | २४८ |
| उत्तरबस्ति-प्रयोगविधि | २४१ | प्रतिमर्शनस्य के काल | २४८ |
| उत्तरबस्ति की संख्या | २४२ | प्रतिमर्शनस्य के लाभ | २४९ |
| स्त्रियों में उत्तरबस्ति | २४२ | अवस्था का विचार | २४९ |
| बस्तिनेत्र का परिमाण | २४२ | नस्य में तेल का प्रयोग | २४९ |
| स्नेहमात्रा का निर्देश | २४२ | मर्श-प्रतिमर्श में फलभेद | २४९ |
| उत्तरबस्ति-प्रयोगविधि | २४२ | अणुतेल का वर्णन | २५० |