भारतकोश
अष्टाङ्गहृदयम्

अष्टाङ्गहृदयम्

Ashtanga Hridayam

श्रीमद्वाग्भट द्वारा

स्रोत: चौखम्बा संस्कृत प्रतिष्ठान - निर्मला हिन्दी व्याख्या (डॉ० ब्रह्मानन्द त्रिपाठी) · चौखम्बा संस्कृत प्रतिष्ठान, दिल्ली · 1999 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished387 पृष्ठ

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( २९ )

विषयपृष्ठांकविषयपृष्ठांक
वमन-निर्देश२१९औषध-प्रयोग में सावधानी२२७
वमन के अयोग्य व्यक्ति२२०दुर्बल के दोषों पर विचार२२७
वमन आदि का निषेध२२०दोषनिर्हरण की आवश्यकता२२७
विरेचन के योग्य रोग२२०पुनः शोधन-निर्देश२२७
विरेचन के अयोग्य रोग२२०विरेचन में विविध विचार२२७
वमनकारक औषधद्रव्य एवं प्रयोग-विधि२२१शोधन के अयोग्य रोगी२२७
वमन की प्रतीक्षा२२१शोधन के भेद२२७
वमनकारक यल्ल२२१स्नेहन-स्वेदन-प्रयोग२२७
वमन में औषध-प्रयोग२२१मलों का उल्केशन२२८
वमन की अवधि२२२स्नेहन-स्वेदन के लाभ२२८
हीनयोग में औषध-प्रयोग२२२संशोधन से लाभ२२८
वमन का हीनयोग२२२( १९ ) बस्तिविधिरध्यायः
वमन का सम्यगयोग२२२बस्ति का वर्णन२२९
वमन का अतियोग२२२बस्ति का प्रयोग२२९
वमन के पश्चात् कर्म२२२बस्तिप्रयोग से लाभ२२९
स्नान एवं भोजन विधि२२३बस्ति-परिचय२३०
पेया आदि क्रम-निर्देश२२३निरुहण के अयोग्य२३०
पेया आदि से लाभ२२३निरुहण एवं अनुवासन के योग्य२३१
वमन-विरेचन के वेग एवं परिमाण२२३निरुहण एवं अनुवासन के अयोग्य२३१
वमन-विरेचन की अवधि एवं मान२२४बस्तिनेत्र-परिचय२३१
भारमापन-विधि२२४नेत्र-निरुक्ति२३१
वमन के बाद विरेचन२२४नेत्र का आकार२३१
मुटुकोष्ठ का वर्णन२२४नेत्र की मोटाई२३२
कूरकोष्ठ का वर्णन२२४बस्तिनेत्र का छिद्र२३२
दोषानुसार विरेचन२२४कर्णिका का वर्णन२३२
विरेचक उपाय२२४बस्तिपुट का वर्णन२३३
पुनः विरेचन-प्रयोग२२५अन्य बस्तिपुट-विधान२३३
हीनयोग के लक्षण२२५निरुहणबस्ति की मात्रा२३३
समयोग के लक्षण२२५अनुवासनबस्ति की मात्रा२३३
अतियोग के लक्षण२२५बस्ति देने की विधि२३३
समयोग में पश्चात् कर्म२२५बस्तिनेत्र के प्रवेश की विधि२३४
समयोग में भोजनविधि२२५बस्ति के पश्चात् कर्म२३४
लंघन-निर्देश२२५स्नेह के लौटने पर आहार२३४
लंघन का फल२२६स्नेह के न लौटने पर चिकित्सा२३४
पेया आदि का आवश्यकता२२६विशेष-चिकित्सा२३४
पेयासेवन का निषेध२२६पुनः अनुवासन-प्रयोग२३५
वमन-विरेचन की प्रतीक्षा२२६निरुहणबस्ति-प्रयोग२३५
वमन-विरेचन की चिकित्सा२२६निरुहण-प्रयोगविधि२३५
मुटुविरेचन का निर्देश२२६बस्तिद्रव-निर्माणविधि२३५