अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
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Read in contextप्रथम प्रकट होने वाले, मेघों को चीरने वाले, सत्यभाषी आंगिरस अर्थात् अंगिरा गोत्र वाले बृहस्पति हवि प्राप्त करने के अधिकारी हैं. वे पालन कर्ता, आकाश और पृथ्वी में शब्द करने वाले, दो बर्हों अर्थात् मोर के पंखों से सुशोभित, धर्म का पालन करने वाले और वर्षा करने वाले हैं. (१) जनाय चिद् य ईवत उ लोकं बृहस्पतिर्देवहूतौ चकार. घ्नन् वृत्राणि वि पुरो दर्देरीति जयं छत्रूंरमित्रान् पृत्सु साहन्.. (२) देवहूति में संतान को उत्पन्न करने वाले एवं मनुष्यों को प्राप्त होने वाले बृहस्पति मेघों को खंडित करें. वे वृत्र के नगर का विनाश करते हैं. वे शत्रुओं पर विजय प्राप्त करते हुए सेनाओं का सामना करते हैं. (२) बृहस्पतिः समजयद वसूनि महो व्रजान् गोमतो देव एषः. अपः सिषासन्त्स्व १ रप्रतीतो बृहस्पतिर्हन्त्यमित्रमर्कैः.. (३) बृहस्पति ने गायों से भरी हुई विशाल गोशालाओं तथा धनों पर विजय प्राप्त कर ली है. वे जल देने के लिए स्वर्ग पर चढ़ते हैं तथा मंत्रों के द्वारा शत्रुओं को नष्ट कर देते हैं. (३) सूक्त-९१ देवता—बृहस्पति इमां धियं सप्तशीर्णीं पिता न ऋतप्रजातां बृहतीमविन्दत्. तुरीयं स्विज्जनयद् विश्वजन्यो ऽ यास्य उक्थमिन्द्राय शंसन्.. (१) बृहस्पति ने सत्य के द्वारा उत्पन्न सात सिरों वाली बुद्धि को प्राप्त किया है. विश्व से उत्पन्न अयास्य ने इंद्र से कह कर तुरीय को उत्पन्न कराया. (१) ऋतं शंसन्त ऋजु दीध्याना दिवसपुत्रासो असुरस्य वीराः. विप्रं पदमङ्गिरसो दधाना यज्ञस्य धाम प्रथमं मनन्त.. (२) सत्य कथन द्वारा प्राण के वीर्य से उत्पन्न हुए अंगिरा यज्ञशाला में प्रथम अर्थात् उत्तम समझे जाते हैं. (२) हंसैरिव सखिभिर्वावदद्भिरश्मन्मयानि नहना व्यस्यन्. बृहस्पतिरभिकनिक्रदद् गा उत प्रास्तौदुच्च विद्वां अगायत.. (३) गर्जन करने वाले मेघों का उद्घाटन करते हुए बृहस्पति स्तुति करते हैं. इसी कारण वे विद्वान् समझे जाते हैं. (३) अवो द्वाभ्यां पर एकया गा गुहा तिष्ठन्तीरनृतस्य सेतौ. बृहस्पतिस्तमसि ज्योतिरिच्छन्नुदुस्रा आकर्वि हि तिस्र आवः.. (४) ebook converter DEMO Watermarks*