अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1022, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंकरते हैं. (३) सूक्त-१०४ देवता—इंद्र इमा उ त्वा पुरूवसो गिरो वर्धन्तु या मम. पावकवर्णाः शुचयो विपश्चितो ऽ भि स्तोमैरनूषत.. (१) हे इंद्र! तुम अपरिमित ऐश्वर्य वाले हो. अग्नि के समान पवित्र हमारी वाणियां तुम्हारी वृद्धि करें. हे स्तोताओ! तुम इंद्र के लिए प्रशंसा मंत्रों का उच्चारण करो. (१) अयं सहस्रमृषिभिः सहस्कृतः समुद्र इव पप्रथे. सत्यः सो अस्य महिमा गृणे शवो यज्ञेषु विप्रराज्ये.. (२) जल के द्वारा बढ़े हुए सागर के समान ये अग्नि ऋषियों द्वारा दी गई हवियों से हजार गुना बढ़ते हैं. मैं इन अग्नि की महिमा का यथार्थ रूप में बखान कर रहा हूं. इन अग्नि का बल यज्ञ में देखने योग्य होता है. (२) आ नो विश्वासु हव्य इन्द्रः समत्सु भूषतु. उप ब्रह्माणि सवनानि वृत्रहा परमज्या ऋचीषमः.. (३) हे इंद्र! तुम हवि प्राप्त करने योग्य हो. तुम हमें सभी यज्ञों में सुशोभित करो. वृत्र राक्षस को मारने वाले इंद्र ऋचाओं के अनुसार अपना रूप प्रकट करते हैं. वे इंद्र हमारे सूक्तों, हवियों तथा मंत्रों को सुशोभित बनाएं. (३) त्वं दाता प्रथमो राधसामस्यसि सत्य ईशानकृत्. तुविद्युम्नस्य युज्या वृणीमहे पुत्रस्य शवसो महः.. (४) हे धनों को देने वाले अग्नि! तुम सब को प्रभुता प्रदान करते हो. तुम जलों के पुत्र हो. हम प्रदीप्त अग्नि का वरण करते हैं. (४) सूक्त-१०५ देवता—इंद्र त्वमिन्द्र प्रतूर्तिष्वभि विश्वा असि स्पृधः. अशास्तिहा जनिता विश्वतूरसि त्वं तूर्य तरुष्यतः.. (१) हे इंद्र! तुम अशक्ति के नाशक, कल्याणकारी तथा हिंसापूर्ण युद्धों में प्रतिस्पर्धा करने वाले हो. तुम सब की अपेक्षा शीघ्रता करने वाले हो. (१) अनु ते शुष्मं तुरयन्तमीयतुः क्षोणी शिशुं न मातरा. विश्वास्ते स्पृधः श्रथयन्त मन्यवे वृत्रं यदिन्द्र तूर्वसि.. (२) ebook converter DEMO Watermarks*