भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

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युक्त किया है. देवताओं के सेवक हम उन्हीं के द्वारा अन्न प्राप्त करें तथा वीरों से सुसंगत रहते हुए सौ वर्ष की आयु प्राप्त करें. (६) सूक्त-१२५ देवता—इंद्र अपेन्द्र प्राचो मघवन्नमित्रानपाचो अभिभूते नुदस्व. अपोदीचो अप शूराधराच उरौ यथा तव शर्मन् मदेम.. (१) हे धन के स्वामी इंद्र! तुम पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण—चारों दिशाओं से हमारे शत्रुओं को रोको. इस प्रकार हम तुम्हारे द्वारा दिए हुए सुख से सुखी हो सकेंगे. (१) कुविदङ्ग यवमन्तो यवं चिद् यथा दान्त्यनुपूर्वं वियूय. इहेहैषां कृणुहि भोजनानि ये बर्हिषो नमोवृक्तिं न जग्मुः.. (२) हे अग्नि! जिस प्रकार संपन्न कृषक जौ के बहुत से पौधों को मिला कर काटते हैं, उसी प्रकार तुम हवि से युक्त कुशों का सेवन करो. (२) नहि स्थूर्युतुथा यातमस्ति नोत श्रवो विविदे संगमेषु. गव्यन्त इन्द्रं सख्याय विप्रा अश्वायन्तो वृषणं वाजमन्तः.. (३) युद्धों में हमें अन्न प्राप्त नहीं हुआ. फसलें पकने के समय भी हमें आवश्यकता के अनुसार अन्न प्राप्त नहीं हुआ. इस कारण हम अपने मित्र इंद्र की कामना करते हुए अश्व, गौ तथा अन्न मांगते हैं. (३) युवं सुराममश्विना नमुचावासुरे सचा. विपिपाना शुभस्पती इन्द्रं कर्मस्वावतम्.. (४) हे अश्विनीकुमारो! नमुचि राक्षस के साथ इंद्र का युद्ध होते समय तुम ने आनंदित करने वाला सोमरस पी कर इंद्र की रक्षा की थी. (४) पुत्रमिव पितरावश्विनोभेन्द्रावथुः काव्यैर्दंसनाभिः. यत् सुरामं व्यपिबः शचीभिः सरस्वती त्वा मघवन्नभिष्णक्.. (५) हे इंद्र! तुम ने शोभा धारण करने वाला सोमरस पिया है. सरस्वती देवी अपनी विभूतियों से तुम्हें सींचे. (५) इन्द्रः सुत्रामा स्ववाँ अवोभिः सुमृडीको भवतु विश्ववेदाः. बाधतां द्वेषो अभयं नः कृणोतु सुवीर्यस्य पतयः स्याम.. (६) रक्षक एवं ऐश्वर्य वाले इंद्र अपने रक्षा साधनों से हमें सुख प्रदान करें. ये शक्तिशाली इंद्र eBook converter DEMO Watermarks*