अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 218, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंमैं जो इच्छा और संकल्प करता हूं, वह सत्य हो. मैं सभी प्रकार के पापों से दूर रहूं तथा विश्वे देव मेरी रक्षा करें. (४) मयि देवा द्रविणमा यजन्तां मय्याशीरस्तु मयि देवहूतिः. दैवा होतारः सनिषन् न एतदरिष्टाः स्याम तन्वा सुवीराः.. (५) मैं जिन देवों को बुलाता हूं, वे मुझे अन्न से संपन्न बनाएं. यज्ञ में देवों के होता हमारे समीप बैठें, जिस से हम रोगरहित और शक्तिशाली बन सकें. (५) दैवीः षडुर्वीरुरु नः कृणोत विश्वे देवास इह मादयध्वम्. मा नो विददभिभा मो अशस्तिर्मा नो विदद् वृजिना द्वेष्या या.. (६) हे विश्वे देव! आप सब हमारे लिए पृथ्वी, आकाश, जल, ओषधि, दिन और रात—इन छह दिव्य शक्तियों को बढ़ाइए. आप प्रसन्न हों, जिस से कोई न हमारा तिरस्कार करे और न हमारी निंदा करे. हमें पाप न लगे. (६) तिस्रो देवीर्महि नः शर्म यच्छत प्रजायै नस्तन्वे ३ यच्च पुष्टम्. मा हास्महि प्रजया मा तनूभिर्मा रधाम द्विषते सोम राजन्.. (७) भारती, सरस्वती और पृथ्वी—ये तीन देवियां हमारा कल्याण करें. हमारी प्रजाएं पोषक पदार्थ पा कर पुण्य शरीर वाली हों. हे तेजस्वी सोम! हम संतान एवं पशुओं से हीन न हों तथा शत्रु हमें दुःख न दें. (७) उरुव्यचा नो महिषः शर्म यच्छत्वस्मिन् हवे पुरुहूतः पुरुक्षु. स नः प्रजायै हर्यश्व मृडेन्द्र मा नो रीरिषो मा परा दाः.. (८) हे इंद्र! तुम नदी के समान गतिशील, गुणसंपन्न एवं अन्न के स्वामी हो. तुम हमें इस यज्ञ के कारण सुख प्रदान करो. तुम हमारी संतान का नाश मत करो तथा हमारा त्याग मत करो. (८) धाता विधाता भुवनस्य यस्पतिर्देवः सविताभिमातिषाहः. आदित्या रुद्रा अश्विनोभा देवाः पान्तु यजमानं निर्ऋथात्.. (९) धाता, विधाता, संसार के स्वामी एवं शत्रुहंता सविता देव, आदित्य, रुद्र तथा दोनों अश्विनीकुमार यजमान को पाप से बचाएं और उग्र शत्रुओं से रक्षा करें. (९) ये नः सपत्ना अप ते भवन्त्विन्द्राग्निभ्यामव बाधामह एनान्. आदित्या रुद्रा उपरिस्पृशो न उग्रं चेत्तारमधिराजमक्रत.. (१०) जो हमारे शत्रु हैं, वे हम से दूर भाग जाएं. हम इंद्र और अग्नि के द्वारा अपने शत्रुओं को ebook converter DEMO Watermarks*