अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
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Read in contextअवैतेनारातत्सीरसौ स्वाहा. तिग्मायुधौ तिग्महेती सुशेवौ सोमारुद्राविह सु मृडतं नः.. (६) इस अभिचार कर्म के द्वारा ही इस राजा ने सिद्धि प्राप्त की है एवं शत्रुओं का विनाश किया है. इस की छवि सुंदर आहुति वाली हो. हे सोम एवं रुद्र! तुम तीक्ष्ण शस्त्रों वाले हो. तुम इस युद्ध में विजय प्रदान करा के हमें सुख दो. (६) अपैतेनारातत्सीरसौ स्वाहा. तिग्मायुधौ तिग्महेती सुशेवौ सोमारुद्राविह सु मृडतं नः.. (७) इस अभिचार कर्म द्वारा ही इस राजा ने अपने शत्रुओं का विरोध करते हुए उन का दमन किया तथा सिद्धि प्राप्त की. इस की यह हवि सुंदर आहुति वाली हो. हे सोम और रुद्र! तुम अत्यधिक तीक्ष्ण आयुधों वाले तथा सुख प्राप्त करने वाले हो. तुम हमें इस युद्ध में विजयी बना कर सुख प्रदान करो. (७) मुमुक्तमस्मान्दुरितादवद्याज्जुषेथां यज्ञममृतमस्मासु धत्तम्.. (८) हे सोम एवं रुद्र देव! हमें ऐसे पाप से बचाओ, जिस का नाम लेने में भी लज्जा आती है. तुम इस यज्ञ को प्राप्त करो और इस में अमृत धारण करो. (८) चक्षुषो हेते मनसो हेते ब्रह्मणो हेते तपसश्च हेते. मेन्या मेनिरस्यमेनयस्ते सन्तु ये३स्मां अभ्यघायन्ति.. (९) हे नेत्र की, मन की, ब्रह्म की एवं तप की संहारक शक्ति! तुम सभी आयुधों की अपेक्षा श्रेष्ठ आयुध हो. जो आयुधधारी हमें नष्ट करना चाहते हैं, वे आयुधहीन हो जाएं. (९) यो ३ स्मांश्चक्षुषा मनसा चित्त्याकूत्या च यो अघायुरभिदासात्. त्वं तानग्ने मेन्यामेनीन् कृणु स्वाहा.. (१०) हे अग्नि! हमारी हत्या रूपी पाप करने का इच्छुक जो व्यक्ति हम को चक्षु से, मन से और चित्तवृत्ति से क्षीण करना चाहता है, उसे अपने आयुध के द्वारा आयुधहीन बनाओ. हमारी यह आहुति उत्तम हो. (१०) इन्द्रस्य गृहो ऽ सि. तं त्वा प्र पद्ये तं त्वा प्र विशामि सर्वगुः सर्वपूरुषः सर्वात्मा सर्वतनूः सह यन्मेऽस्ति तेन.. (११) हे अग्नि! तुम इंद्र के गृह हो. तुम सर्वत्र गमन करने वाले, सब के पुरुष, सब की आत्मा एवं सब के शरीर हो. मैं अपने सभी सहयोगियों सहित आप की शरण में आया हूं. (११) eBook converter DEMO Watermarks*