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अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,063 pages

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इन्द्रस्य शर्मासि. तं त्वा प्र पद्ये तं त्वा प्र विशामि सर्वगुः सर्वपूरुषः सर्वात्मा सर्वतनूः सह यन्मेऽस्ति तेन.. (१२) हे अग्नि! तुम इंद्र के मुख, सर्वत्र गमन करने वाले, सब की आत्मा, सब के शरीर एवं सब के पुरुष हो. मैं अपने सभी सहयोगियों सहित तुम्हारी शरण में आया हूं. (१२) इन्द्रस्य वर्मासि. तं त्वा प्र पद्ये तं त्वा प्र विशामि सर्वगुः सर्वपूरुषः सर्वात्मा सर्वतनूः सह यन्मे ऽ स्ति तेन.. (१३) हे अग्नि! तुम इंद्र के कवच, सर्वत्र गमन करने वाले, सब की आत्मा, सब के शरीर और सब के पुरुष हो. मैं अपने समस्त परिवार और पूरी संपत्ति के साथ तुम्हारी शरण में आता हूं. (१३) इन्द्रस्य वरूथमसि. तं त्वा प्र पद्ये तं त्वा प्र विशामि सर्वगुः सर्वपूरुषः सर्वात्मा सर्वतनूः सह यन्मे ऽ स्ति तेन.. (१४) हे अग्नि! तुम इंद्र के सैनिक, सर्वत्र गमन करने वाले, सब के पुरुष, सब की आत्मा और सब के शरीर हो. मैं अपने सभी सहयोगियों सहित तुम्हारी शरण में आया हूं. (१४) सूक्त-७ देवता—अराति आ नो भर मा परि ष्ठा अराते मा नो रक्षीर्दक्षिणां नीयमानाम्. नमो वीत्सार्या असमृद्धये नमो अस्त्वरातये.. (१) हे अराति! हम को धन संपन्न बना. तू हमारे चारों ओर स्थित मत हो और हमारे द्वारा लाई गई दक्षिणा को प्रभावित मत कर. यह हवि हम दान हीनता की अधिष्ठात्री देवी को वृद्धि न होने की इच्छा से दे रहे हैं. यह तुझे प्राप्त हो. (१) यमराते पुरोधत्से पुरुषं परिरापिणम्. नमस्ते तस्मै कृण्मो मा वनिं व्यथयीर्मम.. (२) हे अराति! हम उस पुरुष को दूर से प्रणाम करते हैं, जो तुम्हारे सम्मुख रहता है एवं केवल बोलने वाला है, काम नहीं करता. तुम हमारी इस इच्छा को ठुकराना मत. (२) प्र णो वनिर्देवकृता दिवा नक्तं च कल्पताम्. अरातिमनुप्रेमो वयं नमो अस्त्वरातये.. (३)