भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 272, कुल 1063 में से

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हो. (१७) सूक्त-३१ देवता—कृत्या का प्रतिहरण यां ते चक्रुरामै पात्रे यां चक्रुर्मिश्रधान्ये. आमे मांसे कृत्यां यां चक्रुः पुनः प्रति हरामि ताम्.. (१) हे कृत्या! अभिचार करने वाले ने मिट्टी के कच्चे पात्र में चावल, जौ, गेहूं, उपवाक, तिल एवं कांगनी के मिले हुए अन्नों में अथवा मुरगे आदि के मांसों में तुझे स्थित किया है. मैं तुझे उसी की ओर लौटाता हूं, जिस ने अभिचार कर के तुझे भेजा है. (१) यां ते चक्रुः कृकवाकावजे वा यां कुरीरिणि. अव्यां ते कृत्यां यां चक्रुः पुनः प्रति हरामि ताम्.. (२) हे कृत्या! अभिचारकर्ता ने तुझे मुरगे अथवा बकरे के मांस में अथवा पेड़ पर स्थित किया है. मैं तुझे उसी की ओर लौटाता हूं, जिस ने तुझे अभिचार कर के भेजा है. (२) यां ते चक्रुरेकशफे पशूनामुभयादति. गर्दभे कृत्यां यां चक्रुः पुनः प्रति हरामि ताम्.. (३) हे कृत्या! अभिचारकर्ता ने तुझे एक शाफ अर्थात् टाप वाले और दोनों ओर दांतों वाले (घोड़े या गधे) पशु पर स्थित किया है. हम तुझे उसी की ओर लौटाते हैं, जिस ने अभिचार कर के तुझे भेजा है. (३) यां ते चक्रूरमूलायां वलगं वा नराच्याम्. क्षेत्रे ते कृत्यां यां चक्रुः पुनः प्रति हरामि ताम्.. (४) हे कृत्या! अभिचारकर्ता ने तुझे मनुष्यों द्वारा पूजित खाने के पदार्थ में ढक कर खेत में स्थित किया है. हम तुझे उसी की ओर लौटाते हैं, जिस ने अभिचार कर के तुझे भेजा है. (४) यां ते चक्रुर्गार्हपत्ये पूर्वाग्नावुत दुश्चितः. शालायां कृत्यां यां चक्रुः पुनः प्रति हरामि ताम्.. (५) हे कृत्या! अभिचार करने वाले ने तुझे गार्हपत्य अग्नि में अथवा यज्ञशाला में स्थित किया है. हम तुझे उसी की ओर लौटाते हैं, जिस ने अभिचार कर के तुझे भेजा है. (५) यां ते चक्रुः सभायां यां चक्रुरधिदेवने. अक्षेषु कृत्यां यां चक्रुः पुनः प्रति हरामि ताम्.. (६) हे कृत्या! अभिचार करने वाले ने तुझे सभा में अथवा जुआ खेलने के पासों में स्थित

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