अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 282, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंदुर्बुद्धि के लिए नमस्कार है. (२) नमस्ते यातुधानेभ्यो नमस्ते भेषजेभ्य:. नमस्ते मृत्यो मूलेभ्यो ब्राह्मणेभ्य इदं नम:.. (३) हे मृत्यु! तुझ से संबंधित राक्षसों को नमस्कार है, जो लोगों को पीड़ा पहुंचाते हैं. तुझ से रक्षा करने वाली ओषधियों को नमस्कार है. तुझ से संबंधित मूल पुरुषों तथा शापानुग्रह समर्थ ब्राह्मणों के लिए नमस्कार है. (३) सूक्त-१४ देवता—बलास अस्थिस्रंसं परुस्रंसमास्थितं हृदयामयम्. बलासं सर्वं नाशयाङ्गेष्ठा यश्च पर्वसु.. (१) मंत्र की शक्ति से हड्डियों को कंपित करने वाले, शरीर के जोड़ों को ढीला करने वाले तथा सारे शरीर में व्याप्त श्लेष्मा द्वारा किए हुए हृदय रोग की शक्ति का विनाश करे. वह रोग खांसी और सांस से संबंधित है. (१) निर्बलासं बलासिनः क्षिणोमि पुष्करं यथा. छिनद्म्यस्य बन्धनं मूलमुर्वार्व्वा इव.. (२) जिस प्रकार सरोवर से कमल उखाड़ा जाता है, उसी प्रकार मैं इस रोगी पुरुष के श्लेष्मा रोग को जड़ से नष्ट करता हूं. जिस प्रकार पकी हुई ककड़ी अपने नाल से अपनेआप अलग हो जाती है, उसी प्रकार मैं इस रोगी के श्लेष्मा रोग का बंधन तोड़ता हूं. (२) निर्बलासेतः प्र पताशुङ्गः शिशूको यथा. अथो इट इव हायनो ऽ प द्राह्यवीरहा.. (३) हे श्लेष्मा रोग! जिस प्रकार भागा हुआ शुंशुकि हरिण दूर चला जाता है तथा गया हुआ संवत्सर फिर वापस नहीं आया, उसी प्रकार हमारे वीरों के विनाशकारी तू इस रोगी को छोड़ कर बुरी दिशा में चला जा. (३) सूक्त-१५ देवता—वनस्पति उत्तमो अस्योषधीनां तव वृक्षा उपस्तयः. उपस्तिरस्तु सो ३ स्माकं यो अस्मां अभिदासति.. (१) हे सोमपर्ण से उत्पन्न पलाश वृक्ष! तू वनस्पतियों में उत्तम है. सभी वृक्ष तेरे उपासक अर्थात् तुझ से निम्न स्थिति वाले हैं. तेरी कृपा से हमारा वह शत्रु हमारा उपासक बने जो हमें नष्ट करना चाहता है. (१) ebook converter DEMO Watermarks*