भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

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पाप नाशक गंगा आदि नदियों का जल हिमालय से निकलता है और सागर में मिलता है. इस प्रकार का दिव्य जल हृदय की जलन मिटाने वाली ओषधियां प्रदान करे. (१) यन्मे अक्ष्योराद्योत पाष्ण्योः प्रपदोश्च यत्. आपस्तत् सर्व निष्करन् भिषजां सुभिषक्तमाः.. (२) जो रोग मेरी आंखों को व्यथित करते हैं, जो मेरे घुटनों और जांघों में आश्रय लेते हैं, व्याधि विनाशकों में कुशल दिव्य जल उन सब को नष्ट करें. (२) सिन्धुपत्नीः सिन्धुराज्ञीः सर्वा या नद्य १ स्थन. दत्त नस्तस्य भेषजं तेना वो भुनजामहै.. (३) हे जलो! सागर तुम्हारा पति है और तुम सागर रूपी राजा की पत्नियां हो. तुम सब नदी रूप हो जाओ. तुम सब मुझे उस रोग को दूर करने की ओषधि दो, जिस से मैं निरोग हो सकूं. (३) सूक्त-२५ देवता—गंडमालाविनाशन पञ्च च याः पञ्चाशच्च संयन्ति मन्या अभि. इतस्ताः सर्वा नश्यन्तु वाका अपचितामिव.. (१) गले के ऊपरी भाग में स्थित पचपन प्रकार की गंड मालाएं गले के ऊपरी भाग की धमनियों को व्याप्त करती हैं. वे सब इस प्रकार नष्ट हो जाएं, जिस प्रकार पतिव्रता को पा कर सभी दोष नष्ट हो जाते हैं. (१) सप्त च याः सप्ततिश्च संयन्ति ग्रैव्या अभि. इतस्ताः सर्वा नश्यन्तु वाका अपचितामिव.. (२) गरदन की नसों में स्थित सतहत्तर प्रकार की गंडमालाएं गरदन की धमनियों को व्याप्त करती हैं. वे सब इस प्रकार नष्ट हो जाएं, जिस प्रकार पतिव्रता को पा कर सभी दोष नष्ट हो जाते हैं. (२) नव च या नवतिश्च संयन्ति स्कन्ध्या अभि. इतस्ताः सर्वा नश्यन्तु वाका अपचितामिव.. (३) कंधों की नसों में स्थित निन्यानवे प्रकार की गंडमालाएं कंधों की धमनियों को व्याप्त करती हैं. वे सब इस प्रकार नष्ट हो जाएं, जिस प्रकार पतिव्रता को पा कर सभी दोष नष्ट हो जाते हैं. (३) सूक्त-२६ देवता—पाप्मा ebook converter DEMO Watermarks*