अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 313, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंइंद्र और उषा — ये दोनों देव सभी दिशाओं के संचरण मार्गों को रोक दें. इस समय दूर दिखाई देने वाली शत्रु सेनाएं अत्यधिक मोह में पड़ जाएं और उन में कार्याकार्य का निर्णय करने की क्षमता न रहे. (१) मूढा अमित्राश्चरताशीर्षाण इवाहयः. तेषां वो अग्निमूढानामिन्द्रो हन्तु वरंवरम्.. (२) हे शत्रुओ! कटे हुए शीश वाले सांप जिस प्रकार हिलतेडुलते हैं, कुछ कर नहीं पाते, उसी प्रकार तुम जय के उपाय से शून्य हो कर युद्धभूमि में घूमो. हमारी आहुतियों के कारण मोह को प्राप्त उन शत्रुओं का वध श्रेष्ठ नायक इंद्र करें. (२) ऐषु नह्य वृषाजिनं हरिणस्य भियं कृधि. पराङमित्र एषत्वर्वाची गौरुपेषतु.. (३) हे इच्छा पूर्ण करने वाले इंद्र! तुम सोम मणि को ढकने वाले कृष्ण मृग-चर्म को हमारे योद्धाओं में बांधो. हमारे शत्रु हमारे सामने से भाग जाएं तथा उन शत्रुओं का पशु धन हमें प्राप्त हो. (३) सूक्त-६८ देवता—सविता आदि आयमगन्त्सविता क्षुरेणोष्णेन वाय उदकेनेहि. आदित्या रुद्रा वसव उन्दन्तु सचेतसः सोमस्य राज्ञो वपत प्रचेतसः.. (१) आकाश में दिखाई देते हुए सब के प्रेरक सविता देव मुंडन करने वाले उस्तरे के साथ आए हैं. हे वायु! गरम जल के साथ तुम भी आओ. बारह आदित्य, एकादश रुद्र तथा आठ वसु—ये सब समान ज्ञान वाले हो कर उस जल से बालक का सिर गीला करें. हे सेवको! तुम वरुण और राजा सोम से संबंधित उस्तरे के द्वारा गीले बालों को काटो. (१) अदितिः श्मश्रु वप्त्वाप उन्दन्तु वर्चसा. चिकित्सतु प्रजापतिर्दीर्घायुत्वाय चक्षसे.. (२) देव माता अदिति इस पुरुष के दाढ़ीमूंछ के बाल अलग करें. जल के देवता अपने तेज से उन्हें भिगोएं. प्रजापति चिरकाल तक जीवन के लिए एवं देखने के लिए इस की चिकित्सा करें. (२) येनावपत् सविता क्षुरेण सोमस्य राज्ञो वरुणस्य विद्वान्. तेन ब्रह्माणो वपतेदमस्य गोमानश्ववानयमस्तु प्रजावान्.. (३) सविता देव ने जानते हुए जिस उस्तरे से सोम के और राजा वरुण के बालों को काटा, हे ब्राह्मणो! तुम उसी उस्तरे से इस पुरुष की दाढ़ी और मूंछों के बाल काटो. इस विशेष संस्कार