भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 316, कुल 1063 में से

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अर्कमणि तेरे प्रजनन अंग अर्थात् लिंग को स्त्री के उपभोग के योग्य बनाए. (१) यथा पसस्तायादरं वातेन स्थूलभं कृतम्. यावत् परस्वतः पसस्तावत् ते वर्धतां पसः.. (२) हे साधक! जिस प्रकार तायादर नाम के प्राणी का प्रजनन अंग अर्थात् लिंग वायु लगने से मोटा हो जाता है और जैसा परस्वर नाम के प्राणी का लिंग होता है, तेरा लिंग भी बढ़ कर उसी परिमाण का हो जाए. (२) यावदङ्गीनं पारस्वतं हास्तिनं गार्दभं च यत्. यावदश्वस्य वाजिनस्तावत् ते वर्धतां पसः.. (३) हे साधक पुरुष! पारस्वत नामक हरिण की, हाथी की, गधे की जननेंद्रिय जिस प्रकार की होती है तथा यौवन में स्थित घोड़े की जननेंद्रिय जैसी होती है, तेरी पुरुषेंद्रिय भी उसी परिमाण में बढ़ जाए. (३) सूक्त-७३ देवता—वरुण एह यातु वरुणः सोमो अग्निबृहस्पतिर्वसुभिरेह यातु. अस्य श्रियमुपसंयात सर्व उग्रस्य चेत्तुः संमनसः सजाताः.. (१) वरुण, सोम एवं अग्नि देव कर्म के निमित्त यहां आएं. बृहस्पति देव आठ वसुओं के साथ यहां आएं. हे समान जन्म वाले बांधवो! तुम सब समान मन वाले हो कर इस शक्तिशाली एवं कार्याकार्य जानने वाले यजमान के अधीन हो जाओ. (१) यो वः शुष्मो हृदयेष्वन्तराकूतिर्या वो मनसि प्रविष्टा. तान्तसीवयामि हविषा घृतेन मयि सजाता रमतिर्वो अस्तु.. (२) हे बांधवो! तुम्हारे हृदयों में जो शीर्षक बल है और तुम्हारे मन में जो सब कुछ प्राप्त करने की अभिलाषा है, मैं हवन किए जाते हुए इस हवि के द्वारा बल और उस अभिलाषा को परस्पर संबंधित करता हूं. तुम्हारी अनुकूल प्रवृत्ति मुझ सौमनस्य के इच्छुक पुरुष को प्राप्त हो. (२) इहैव स्त माप याताध्यस्मत् पूषा परस्तादपथं वः कृणोतु. वास्तोष्पतिरनु वो जोहवीतु मयि सजाता रमतिर्वो अस्तु.. (३) हे बांधवो! आप मेरे घर में प्रेम से निवास करें तथा यहां से कहीं न जाएं. यदि तुम मेरे प्रतिकूल आचरण करो तो सविता देव तुम्हारा मार्ग रोकें. घरों के पालक देव वाष्तोस्पति तुम्हें मेरे लिए बुलाएं. सौमनस्य के इच्छुक मुझ यजमान के प्रति तुम्हारी अनुकूल प्रवृत्ति हो. (३) ebook converter DEMO Watermarks*

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