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अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,063 pages

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हे अग्नि! सब के द्वारा सेवित एवं प्रसन्न मन वाला अतिथि सभी यजमानों के घरों में आए तथा तुम्हारे विषय में मेरी भक्ति को जाने. हे अग्नि! तुम मुझ पर आक्रमण करने वाली शत्रु सेनाओं को त्याग कर मेरे शत्रुओं का भोजन मेरे लिए लाओ. (९) अग्ने शर्ध महते सौभाग्य तव द्युम्नान्युत्तमानि सन्तु. सं जास्पत्यं सुयममा कृणुष्वशत्रूयतामभि तिष्ठा महांसि.. (१०) हे अग्नि! तुम हमें धनधान्य देने के लिए कोमल मन वाले बनो. तुम्हारे प्रकाशित होते हुए तेज उत्तम हों. तुम इस प्रकार की कृपा करो, जिस से हम पतिपत्नी दोनों एकमात्र तुम्हारी सेवा करें. जो अपनेआप को हमारा शत्रु मानते हैं, उन के तेजों पर तुम आक्रमण करो. (१०) सूयवसाद् भगवती हि भूया अधावयं भगवन्तः स्याम. अद्धि तृणमघ्न्ये विश्वदानीं पिब शुद्धमुदकमाचरन्ती.. (११) हे धर्मदुघा धेनु! तू उत्तम घास खाती हुई हमारे लिए सौभाग्यशालिनी हो, इस से हम भी धन वाले बनें. तू सदा घास का भक्षण कर तथा शोभन भाग्य वाली बन. हे गाय! तू सर्वदा घास खा तथा सभी ओर घूमती हुई निर्मल जल पी. (११) सूक्त-७८ देवता—मंत्र में बताए गए अपचितां लोहिनीनां कृष्णा मातेति शुश्रुम. मुनेर्देवस्य मूलेन सर्वा विध्यामि ता अहम्.. (१) हम ने ऐसा सुना है कि लाल रंग की गंडमालाओं को उत्पन्न करने वाली कृष्णा नाम की राक्षसी है. इस प्रकार की बढ़ी हुई सभी गंडमालाओं को मैं द्योतमान अथर्वा ऋषि के द्वारा बताए हुए बाण से विदीर्ण करता हूं. (१) विध्याम्यासां प्रथमां विध्याम्युत मध्यमाम्. इदं जघन्या मासाम छिन्द्वि स्तुकामिव.. (२) दोष की दृष्टि से गंडमालाएं तीन प्रकार की हैं. उन्हीं का यहां वर्णन है. मैं इन पकी हुई गंडमालाओं में से मुख्य गंडमाला को जानता हूं, जिस की चिकित्सा करना कठिन है. मैं बाण से उसे फाड़ता हूं. दूसरे प्रकार की सुसाध्य अर्थात् सरलता से चिकित्सा के योग्य गंडमाला मध्यमा है. मैं उसे भी फोड़ता हूं. इस समय मैं इन गंडमालाओं के मध्य उस को ऊन के धागे के समान तोड़ता हूं, जिस की चिकित्सा थोड़े प्रयत्न से हो सकती है. (२) त्राष्ट्रेणाहं वचसा वि त ईर्ष्याममीमदम्. अथो यो मन्युष्टे पते तमु ते शमयामसि.. (३) ebook converter DEMO Watermarks*