अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंशरीर को अपना जन्म स्थान अग्नि जान कर हमारे शरीर से बाहर निकल जा. (२) यदि शोको यदि वाभिशोको यदि वा राज्ञो वरुणस्यासि पुत्रः. हूडुर्नामासि हरितस्य देव स नः संविद्वान् परि वृङ्ग्धि तक्मन्.. (३) हे शीत ज्वर! तुम शरीर को शोकाकुल करने वाले, शरीर को सभी प्रकार से सुखाने वाले एवं तेजस्वी वरुण के पुत्र हो. तुम हूड नाम से प्रसिद्ध हो. तुम हमारे गरम जल से भीगे हुए शरीर को अपना जन्म स्थान अग्नि जान कर हमारे शरीर से बाहर निकल जाओ. (३) नमः शीताय तक्मने नमो रूराय शोचिषे कृणोमि. यो अन्येद्युरुभयद्युरभ्येति तृतीयकाय नमो अस्तु तक्मने.. (४) मैं शीत उत्पन्न करने वाले ज्वर को नमस्कार करता हूं. मैं ठंड लगने के बाद चढ़ने वाले एवं शोककारक ज्वर को प्रणाम करता हूं. जो ज्वर प्रतिदिन दूसरे दिन एवं तीसरे दिन आता है, मैं उस के लिए नमस्कार करता हूं. (४) सूक्त-२६ देवता—इंद्र आदि आरे ३ सावस्मदस्तु हेतिर्देवासो असत्. आरे अश्मा यमस्यथ.. (१) हे देवो! आप की कृपा से शत्रु द्वारा प्रयुक्त खड्ग आदि आयुध हमारे शरीर से दूर हो जाएं. हे शत्रुओ! तुम यंत्र आदि के द्वारा जो पत्थर फेंकते हो, वे भी हम से दूर रहें. (१) सखासावस्मभ्यमस्तु रातिः सखेन्द्रो भगः सविता चित्रराधाः.. (२) आकाश में दिखाई देते हुए सूर्य देव हमारे मित्र हों. संपत्ति देने वाले सविता देव हमारे मित्र हों. सविता देव अनेक प्रकार के धनों के स्वामी हैं. वे तथा इंद्र देव हमारे मित्र हैं. (२) यूयं नः प्रवतो नपान्मरुतः सूर्यत्वचसः. शर्म यच्छाथ सप्रथाः.. (३) हे सूर्य द्वारा पृथ्वी से सोखे हुए जल को न गिराने वाले पर्जन्य देव! हे सात गणों वाले मरुत् देव! आप सब सूर्य के समान तेज वाले हैं. आप सब हमारा विस्तार से कल्याण करें. (३) सुषूदत मृडत मृडया नस्तनूभ्यो मयस्तोकेभ्यस्कृधि.. (४) हे इंद्र आदि देवो! आप शत्रुओं द्वारा छोड़े जाने वाले आयुधों को हम से दूर करो तथा हमें सुख दो. हे इंद्र आदि देवो! आप हमारे शरीरों को सुख दें एवं हमारी संतान को सुखी बनाएं. (४) ebook converter DEMO Watermarks*