अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंयहां से प्रस्थान करने तक इस की रक्षा कर. इसे वृद्धावस्था तक भाग्य के रूप में हमें प्राप्त करा. हमारी वृद्धावस्था इसे मृत्यु प्रदान करे. मरने पर हम इस पके हुए ओदन के साथ स्वर्ग में आनंद प्राप्त करें. (५८) ध्रुवायै त्वा दिशे विष्णवे ऽ धिपतये कल्माषग्रीवाय रक्षित्र ओषधीभ्य इषुमतीभ्यः. एतं परि दद्मस्तं नो गोपायतास्माकमैतोः. दिष्टं नो अत्र जरसे नि नेषज्जरा मृत्यवे परि णो ददात्वथ पक्वेन सह सं भवेम.. (५९) हे ओदन! हम तुझे ध्रुव अर्थात् नीचे की ओर वाली दिशा, उस के अधिपति विष्णु, संरक्षण कर्ता कल्माष ग्रीव नामक सर्प और इषुमन्ती ओषधियों को देते हैं. तुम हमारे जाने के समय तक इस की रक्षा करो. उसे हमारे कर्मों के फल स्वरूप जीर्ण अवस्था प्राप्त कराओ. जीर्णावस्था इसे मृत्यु को सौंपे. इस पके हुए अन्न के साथ हम पुनः उत्पन्न होंगे. (५९) ऊर्ध्वायै त्वा दिशे बृहस्पतये ऽ धिपतये श्वित्राय रक्षित्रे वर्षायिषुमते. एतं परि दद्मस्तं नो गोपायतास्माकमैतोः. दिष्टं नो अत्र जरसे नि नेषज्जरा मृत्यवे परि णो ददात्वथ पक्वेन सह सं भवेम.. (६०) हम तुझे ऊर्ध्व दिशा, बृहस्पति, सर्प और इषुमान वर्ष को देते है. हमारे यहां से प्रस्थान करने तक तू इस की रक्षा कर. इसे वृद्धावस्था तक हमारे भाग्य के रूप में प्राप्त करा. वृद्धावस्था मृत्यु प्रदान करे. मरने पर हम इस सुपक्व ओदन सहित स्वर्गगामी हों तथा वहां आनंद प्राप्त करें. (६०) सूक्त-४ देवता—वशा ददामीत्येव ब्रूयादनु चैनामभुत्सत्. वशां ब्रह्मभ्यो याचद्भ्यस्तत् प्रजावदपत्यवत्.. (१) मैं मांगने वाले ब्राह्मणों को देता हूं, ऐसा कह कर उत्तर दे, फिर वे ब्राह्मण कहें कि यह कर्म यजमान को संतान आदि से संपन्न कराने वाला हो. (१) प्रजया स वि क्रीणीते पशुभिश्चोप दस्यति. य आर्षेयेभ्यो याचद्भयो देवानां गां न दित्सति.. (२) जो पुरुष ऋषियों सहित मांगने वाले ब्राह्मणों को देवताओं के निमित्त गोदान नहीं करता, वह अपनी संतान विक्रय करने वाला होता हुआ पशुओं से हीन हो जाता है. (२) ebook converter DEMO Watermarks*