भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 667, कुल 1063 में से

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पृष्ठ 667

यदन्ये शतं याचेयुर्ब्राह्मणा गोपतिं वशाम्. अथैनां देवा अब्रुवन्नेवं ह विदुषो वशा.. (२२) गौ के स्वामी से चाहे अन्य सैकड़ों ब्राह्मण वशा की याचना करें, पर वशा विद्वान् की होती है, ऐसी देवों की उक्ति है. (२२) य एवं विदुषे ऽ दत्त्वाथान्येभ्यो ददद् वशाम्. दुर्गा तस्मा अधिष्ठाने पृथिवी सहदेवता... (२३) जो पुरुष विद्वान् को गौ न देता हुआ, अन्य ब्राह्मण को देता है, उस के लिए पृथिवी देवताओं सहित दुर्गम हो जाती है. (२३) देवा वशामयाचन् यस्मिन्नग्रे अजायत. तामेतां विद्यान्नारदः सह देवैरुदाजत... (२४) जिस के सामने वशा प्रकट होती है, देवता उस से वशा मांगते हैं. यह जान कर नारद भी देवताओं सहित वहां पहुंच गए. (२४) अनपत्यमल्पपशुं वशा कृणोति पूरुषम्. ब्राह्मणैश्च याचितामथैनां निप्रियायते... (२५) ब्राह्मणों के द्वारा मांगी गई वशा को जो पुरुष अत्यंत प्रिय मानता हुआ नहीं देता है, वही वशा उसे संतानहीन तथा अन्य पशुओं वाला बना देती है. (२५) अग्नीषोमाभ्यां कामाय मित्राय वरुणाय च. तेभ्यो याचन्ति ब्राह्मणास्तेष्वा वृश्चते ऽ ददत्... (२६) ब्राह्मण सोम के लिए, अग्नि के लिए, काम के लिए और मित्रावरुण के लिए वशा को मांगते हैं. वशा न देने पर ये वशा के स्वामी को काटते हैं. (२६) यावदस्या गोपतिर्नोपशृणुयादृचः स्वयम्. चरेदस्य तावद् गोषु नास्य श्रुत्वा गृहे वसेत्... (२७) गौ का स्वामी जब तक गौ के संबंध में कोई संकल्प न करे, तब तक वह उस की गायों में विचरे, फिर उस के घर में वास न करे. (२७) यो अस्या ऋच उपश्रुत्याथ गोष्वचीचरत्. आयुश्च तस्य भूतिं च देवा वृश्चन्ति हीडिताः... (२८) जो संकल्प रूप वाणी के पश्चात भी अपनी गायों में विचरण करता है, वह देवताओं का अपमान करता है और देवताओं द्वारा ही अपनी आयु और ऐश्वर्य को नष्ट करने वाला होता है. ebook converter DEMO Watermarks*