भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 70, कुल 1063 में से

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फावड़े आदि की सहायता से खोदता हूं. तू मुझ से उत्पन्न हुई है. तू हमें भी मधु रस से युक्त बना. (१) जिह्वाया अग्रे मधु मे जिह्वामूले मधूलकम्. ममेदह क्रतावसो मम चित्तमुपायसि.. (२) हे मधु लता! तू मेरी जीभ के अग्र भाग पर शहद के समान स्थित हो तथा जीभ की जड़ में मधु रस वाले मधु नामक जल वृक्ष के फूल के रूप में वर्तमान रह. तू केवल मेरे शरीर व्यापार में लग तथा मेरे चित्त में आ. (२) मधुन्मे निष्क्रमणं मधुन्मे परायणम्. वाचा वदामि मधुमद् भूयासं मधुसन्दृशः.. (३) हे मधु लता! तुम्हें धारण करने से मेरा निकट गमन दूसरों को प्रसन्न करने वाला हो तथा मेरा दूर गमन दूसरों को प्रसन्न करे. मैं वाणी से मधुयुक्त हो कर तथा समस्त कार्यों के द्वारा मधु के समान बन कर सब के प्रेम का पात्र बनूं. (३) मधोरस्मि मधुत्तरो मदुघान्मधुमत्तरः. मामित् किल त्वं वनाः शाखां मधुमतीमिव.. (४) हे मधु लता! मैं तुझ से उत्पन्न होने वाले शहद से भी अधिक मधुर हूं. मैं शहद टपकाने वाले पदार्थ से भी अधिक मधुर हूं. तुम निश्चय ही केवल मुझे उसी प्रकार प्राप्त हो जाओ, जिस प्रकार शहद वाली डाल के पास लोग पहुंच जाते हैं. (४) परि त्वा परितन्तुनेक्षुणागामविद्विषे. यथा मां कामिन्यसो यथा मन्नापगा असः.. (५) हे पत्नी! मैं तुझे सभी ओर व्याप्त एवं ईख के समान मधुर मधु के द्वारा आपस में प्रेम के लिए प्राप्त हुआ हूं. (५) सूक्त-३५ देवता—हिरण्य यदाबध्नन् दाक्षायणा हिरण्यं शतानीकाय सुमनस्यमानाः. तत् ते बध्नाम्यायुषे वर्चसे बलाय दीर्घायुत्वाय शतशारदाय.. (१) हे यजमान! दक्ष की संतान महर्षियों ने सौमनस्य को प्राप्त हो कर राजा शतानीक के लिए जिस निर्दोष स्वर्ण को बांधा था, वही स्वर्ण मैं तेरी दीर्घ आयु, तेज, बल, एवं सौ वर्ष की आयु पाने के लिए तुझे बांधता हूं. (१) नैनं रक्षांसि न पिशाचाः सहन्ते देवानामोजः प्रथमजं ह्ये ३ तत्. ebook converter DEMO Watermarks*