अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
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Read in contextसूक्त-४६ देवता—इंद्र प्रणेतारं वस्यो अच्छा कर्तारं ज्योतिः समत्सु. सासह्वांसं युधा ऽ मित्रान्.. (१) वे इंद्र नेता, युद्ध क्षेत्र में शत्रुओं को वश में करने वाले और यज्ञों में प्रकाश करने वाले हैं. (१) स नः पप्रिः पारयाति स्वस्ति नावा पुरुहूतः. इन्द्रो विश्वा अति द्विषः.. (२) इंद्र अपनी कल्याणकारिणी नाव के द्वारा हमें पार लगाते हुए शत्रुओं से हमारी रक्षा करें. (२) स त्वं न इन्द्र वाजेभिर्दशस्या च गातुया च. अच्छा च नः सुम्नं नेषि.. (३) हे इंद्र! तुम अपनी दसों उंगलियों से हमारे सामने उस सुख को लाते हो, जो अन्न आदि से संपन्न है. (३) सूक्त-४७ देवता—इंद्र तमिन्द्रं वाजयामसि महे वृत्राय हन्तवे. स वृषा वृषभो भुवत्.. (१) कामनाओं की वर्षा करने वाले इंद्र सभी देवों से श्रेष्ठ बनें. हम वृत्र राक्षस का नाश करने के लिए इंद्र को शक्तिशाली बनाते हैं. (१) इन्द्रः स दामने कृत ओजिष्ठः स मदे हितः. द्युम्नी श्लोकी स सोम्यः.. (२) इंद्र प्रशंसनीय, सौम्य, तेजस्वी, बलवान तथा दूसरों को प्रसन्न करने वाले हैं. (२) गिरा वज्रो न संभृतः सबलो अनपच्युतः. ववक्ष ऋष्वो अस्तृतः.. (३) इंद्र अच्छे लोगों को धन देते हैं. वज्रधारी इंद्र शक्तिशाली एवं अविनाशी हैं. (३) इन्द्रमिद् गाथिनो बृहदिन्द्रमर्केभिरर्किणः. इन्द्रं वाणीरनूषत.. (४) स्तोताओं की वाणी इंद्र की स्तुति करती हैं, सामगान के इच्छुक किस के यश का गान करते हैं? पूजा संबंधी मंत्रों के द्वारा इंद्र का ही पूजन किया जाता है. (४) इन्द्र इद्धर्योः सचा संमिश्ल आ वचोयुजा. इन्द्रो वज्री हिरण्ययः.. (५) इंद्र के घोड़े सदा उन के साथ रहते हैं. ऋत्विजों के मंत्रों के उच्चारण के साथ ही उन्हें ebook converter DEMO Watermarks*