अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
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Read in contextपापी मनुष्य इंद्र के आयुधों से बच नहीं सकते, क्योंकि इंद्र के आयुध सैकड़ों सेनाओं के समान विनाश करने वाले हैं. भोग प्रदान करने वाला पर्वत अपने पदार्थों से जिस प्रकार संपन्न बनता है, उसी प्रकार तैयार किए हुए सोमरस को पी कर इंद्र शक्ति से पूर्ण हो जाते हैं और यजमान को अन्न प्रदान करते हैं. (४) सूक्त-५२ देवता—इंद्र वयं घ त्वा सुतावन्त आपो न वृक्तबर्हिषः. पवित्रस्य प्रस्रवणेषु वृत्रहन् परि स्तोतार आसते.. (१) हे इंद्र! हमारे पास वह सोमरस है जो तैयार करने पर जल के समान तरल हो गया है. हम तुम्हारी स्तुति करते हैं. (१) स्वरन्ति त्वा सुते नरो वसो निरेक उक्थिनः. कदा सुतं तृषाण ओक आ गम इन्द्र स्वब्दीव वंसगः.. (२) हे इंद्र! सोमरस तैयार करने के बाद यजमान तुम्हारा आह्वान करते हैं. तुम बैल के समान प्यासे हो कर इस सोमरस को पीने के लिए हमारे यज्ञ में कब आओगे? (२) कण्वेभिर्धृष्णवा धृषद वाजं दर्षि सहस्रिणम्. पिशङ्गरूपं मघवन् विचर्षणे मक्षू गोमन्तममीमहे.. (३) हे इंद्र! तुम शक्तिशाली मनुष्य को भी मार डालते हो तथा उस के धन पर अधिकार कर लेते हो. हम तुम से धन मांगते हैं, जो गौ आदि से युक्त हो. (३) सूक्त-५३ देवता—इंद्र क ईं वेद सुते सचा पिबन्तं कद् वयो दधे. अयं यः पुरो विभिनत्त्योजसा मन्दानः शिप्यन्धसः.. (१) स्तोत्रों को सुन कर सुंदर ठुड्डी वाले इंद्र प्रसन्न होते हैं और शत्रुओं के नगरों का विनाश कर देते हैं. इस बात को कौन नहीं जानता है कि सोम के तैयार होने पर इंद्र कौन सा वैभव धारण करते हैं. (१) दाना मृगो प वारणः पुरुत्रा चरथं दधे. नकिष्ट्वा नि यमदा सुते गमो महांश्चरस्योजसा.. (२) हे इंद्र! रथ में बैठ कर तुम हर्षित मृग के समान अनेक प्रकार से गमन करते हो. तुम्हारे गमन को रोकने में कोई भी समर्थ नहीं है. तुम अपनी शक्ति के कारण महान हो. हमारे द्वारा सोमरस तैयार किए जाने पर तुम यहां आओ. (२) ebook converter DEMO Watermarks*