भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 988, कुल 1063 में से

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पृष्ठ 988

इन्द्रेण सं हि दृक्षसे संजग्मानो अबिभ्युषा. मन्दू समानवर्चसा.. (३) हे इंद्र! तुम सदा ही मरुतों के साथ देखे जाते हो, वे मरुत् भय रहित हैं. तुम्हारा और मरुतों का तेज समान है, इसलिए तुम सदा मरुतों के साथ देखे जाते हो. (३) अनवद्यैरभिद्युभिर्मखः सहस्वदर्चति. गणैरिन्द्रस्य काम्यैः.. (४) इंद्र की कामना करने वालों से यज्ञ की शोभा बढ़ती है. (४) अतः परिज्मन्ना गहि दिवो वा रोचनादधि. समस्मिन्नृञ्जते गिरः.. (५) हे इंद्र! तुम ज्योतिर्मान स्वर्ग से हमारे यज्ञ में आओ. हमारी स्तुतियां इंद्र के साथ ही संयोग करती हैं. (५) इतो वा सातिमीमहे दिवो वा पार्थिवादधि. इन्द्रं महो वा रजसः.. (६) इंद्र पृथ्वीलोक में, इहलोक में अथवा स्वर्गलोक में तात्पर्य यह कि जहां कहीं भी हों, हम वहीं से उन्हें बुलाने की इच्छा करते हैं. (६) इन्द्रमिद् गाथिनो बृहदिन्द्रमर्केभिरर्किणः. इन्द्रं वाणीरनूषत.. (७) पूजा करने वाले यजमान इंद्र की पूजा करते हैं तथा स्तोता इंद्र के ही यश का गान करते हैं. (७) इन्द्र इद्धर्योः सचा संमिश्ल आ वचोयुजा. इन्द्रो वज्री हिरण्ययः.. (८) इंद्र के साथ रहने वाले घोड़े हमारे मंत्रोच्चारण के साथ ही रथ में जोड़ दिए जाते हैं. मनुष्यों के हितैषी इंद्र वज्र धारण करते हैं. (८) इन्द्रो दीर्घाय चक्षस आ सूर्यं रोहयद् दिवि. वि गोभिरद्रिमैरयत्.. (९) इंद्र ने ही सूर्य को स्वर्ग में इसलिए स्थापित किया है कि सब लोग उन्हें देख सकें तथा इंद्र ने ही अपनी सूर्यरूपी किरणों के द्वारा मेघ का भेदन किया है. (९) इन्द्र वाजेषु नो ऽ व सहस्रप्रधनेषु च. उग्र उग्राभिरूतिभिः.. (१०) हे इंद्र! जो युद्ध श्रेष्ठ धन प्राप्त कराने वाला है, उस युद्ध में तुम अपने अतिरिक्त रक्षा साधनों से हमारी रक्षा करो. (१०) इन्द्रं वयं महाधन इन्द्रमर्भे हवामहे. युजं वृत्रेषु वज्रिणम्.. (११) अधिक अथवा थोड़ा धन पाने के लिए हम इंद्र को ही बुलाते हैं. इंद्र ने वृत्र असुर पर ebook converter DEMO Watermarks*