भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 989, कुल 1063 में से

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अपने वज्र का प्रहार किया था. (११) स नो वृषन्नमुं चरुं सत्रादावन्नपा वृधि. अस्मभ्यमप्रतिष्कुतः.. (१२) हे इंद्र! यह सत्य है कि तुम धन देने वाले और फलों की वर्षा करने वाले हो. तुम किसी के हटाने से हटते नहीं हो. तुम हमारे इस चरु का भक्षण करो तथा हमारा सुख बढ़ाओ. (१२) तुज्जेतुज्जे य उत्तरे स्तोमा इन्द्रस्य वज्रिणः. न विन्धे अस्य सुष्टुतिम्.. (१३) मैं धन प्राप्ति के प्रत्येक अवसर पर तथा सदैव धन प्राप्त करने पर धन से संतुष्ट होता हूं. मैं जिन स्तोत्रों का स्मरण करता हूं, उन में इंद्र की महिमा की कोई सीमा नहीं होती. (१३) वृषा यूथेव वंसगः कृष्टीरियर्त्योजसा. ईशानो अप्रतिष्कुतः.. (१४) हे इंद्र! तुम कृषियों को संपन्न करने वाली शक्ति से जलों की वर्षा करते हो. ईशान नाम वाले इंद्र का तिरस्कार कोई नहीं कर सकता. (१४) य एकश्चर्षणीनां वसूनामिरज्यति. इन्द्रः पञ्च क्षितीनाम्.. (१५) इंद्र पांच भूमियों, मनुष्यों तथा ऐश्वर्यों के भी स्वामी हैं. (१५) इन्द्रं वो विश्वतस्परि हवामहे जनेभ्यः. अस्माकमस्तु केवलः.. (१६) इंद्र का ध्यान यदि दूसरे स्तोताओं की ओर हो, तब भी हम इंद्र को बुलाते हैं. वे इंद्र हमारे ही हैं. (१६) एन्द्र सानसिं रयिं सजित्वानं सदासहम्. वर्षिष्ठमूतये भर.. (१७) हे इंद्र! तुम सदा प्रसन्नता देने वाले धन तथा फलों की वर्षा करने वाले बल को हमारी रक्षा करने के लिए धारण करो. (१७) नि येन मुष्टिहत्यया नि वृत्रा रुणधामहै. त्वोतासो न्यर्वता.. (१८) हे इंद्र! हम तुम्हारे द्वारा रक्षित हो कर घोड़ों के स्वामी बनें तथा वृत्र के समान शक्ति वाले शत्रुओं को भी नष्ट कर डालें. (१८) इन्द्र त्वोतास आ वयं वज्रं घना ददीमहि. जयेम सं युधि स्पृधः.. (१९) हे इंद्र! हम तुम्हारे द्वारा रक्षित हैं. हम तुम्हारे विकराल बल को धारण करते हुए अपने शत्रुओं को नष्ट कर डालें. (१९) ebook converter DEMO Watermarks*

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