आयुर्वेद दर्शन

आयुर्वेद दर्शन
Ayurveda Darshan
by वैद्य महादेव चन्द्रशेखर पाठक
Source: 1949 Edition · De Ra Ekatara Indoor · 1949 (origin)
DevanagariHindipublished235 pages
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अप्रतीघातकत्वादि गुणों का 'अभूत' आकाशादिकों में | | ---|---|--- स्वभावतः अस्तित्व | ... | ११३ षड्रसों का धातुपंचक में समन्वय | ... | ११३ चेतना का अधिष्ठान अथवा चेतना, चैतस्, या मनका | | समवायिकारण | ... | ११३ गर्भोत्पादक भावों के प्रतिवाद में भारद्वाज का वक्तव्य | | ११५ दो पञ्चीकरण | ... | ११७ वातपित्तश्लेष्माओं के विषय में भारद्वाज की दृष्टि... | | ११९ गुर्वादि गुणप्रधानतावाद के आद्यप्रवर्तक भारद्वाज .... | | १२०
कांकायन का प्रजापतिवाद
| स्वभाव का प्रतिवाद और प्रजापतिवाद का समर्थन | १२१ | |
|---|---|---|
| वैदिक प्रजापतिवाद | ||
| प्रजापति की तीन ज्योतियाँ | ... | १२४ |
| वायु | .... | १२५ |
| अग्नि | .... | १३० |
| सोम | .... | १३२ |
| प्रजापति का संकल्प और ज्ञातृत्व तथा कर्तृत्व में | ||
| अन्योनानुविधायित्व | .... | १३६ |
| प्रजापतिवाद की अन्य बातें | .... | १३७ |
भिन्न आत्रेय का कालवाद
| प्रजापतिवाद और काल का समर्थन | ... | १३८ |
|---|---|---|
| ऋतुओं के उष्णशीतवर्षलक्षणों का जीवन से संबंध | .... | १३९ |
| संवत्सरात्मक काल के विभाग | ... | १३९ |