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आयुर्वेद दर्शन

आयुर्वेद दर्शन

Ayurveda Darshan

by वैद्य महादेव चन्द्रशेखर पाठक

Source: 1949 Edition · De Ra Ekatara Indoor · 1949 (origin)

DevanagariHindipublished235 pages

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श्री.

आयुर्वेद-दर्शन.

विषय प्रवेश.

इस आयुर्वेद-दर्शन में मुख्यतः इस बात पर विचार करना है कि 'भगवान् पुनर्वसु आत्रेय के समय तक देह लोकरोगोत्पादक विशेषतः पुरुषरोगोत्पादक कारणों के विषय में आयुर्वेद में कितने भिन्न २ दार्शनिक संप्रदाय व उनके भिन्न २ मत प्रचलित थे और इनके विषय में अंतिम निर्णय क्या हुआ' ।

दार्शनिक दृष्ट्या पुरुष रोगोत्पादक कारणों का विचार करने वाले ऋषियों के नाम चरक संहिता के 'यज्ञः पुरुषीय,' 'आत्रेय भद्रा काष्पीय' और 'वातकलाकलीय' परिषदों के विवेचन में उल्लिखित हैं और उनके सांप्रदायिक बक्तव्यों के अंश उक्त परिषदों के अतिरिक्त भी सर्वत्र अभिवेश व आत्रेय के संवाद के रूप में उपलब्ध होते हैं । इनमें जो संप्रदाय वैदिक हैं उनका वैदिक मंत्रों में वर्णन है । सिवाय