भारतकोश
बौधायन धर्मसूत्र (विवरण टीका व हिन्दी अनुवाद)

बौधायन धर्मसूत्र (विवरण टीका व हिन्दी अनुवाद)

Baudhayana Dharmasutra Hindi

महर्षि बौधायन द्वारा

स्रोत: Baudhayana Dharmasutram with Vivarana & Hindi Translation by Dr. Umesh Chandra Pandey (उद्गम)

DevanagariHindipublished486 पृष्ठ

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पृष्ठ 419

दशमः खण्डः ] चतुर्थप्रश्ने दशमोऽध्यायः ३६५

अनु०—पातक, वर्ण का लोप करने वाले पतनीय और उपपातकों को छोड़कर अन्य अपराधों के लिए आधे मास तक प्रतिदिन बारह-बारह प्राणायाम करे। पातक और पतनीय अपराधों को छोड़कर जो अन्य पाप कर्म हों उनके लिए बारह दिन की बारह अवधि तक अर्थात् एक सौ चौवालिस दिन प्रति दिन बारह-बारह प्राणायाम करे ॥ ८-९ ॥

पातकं ब्रह्महत्यादि पतनीयं तत्समानमुपपातकं गोवधादि तद्वर्जितेषु जातिभ्रंशकरादिषु एतत्प्रायश्चित्तम् ॥ ८,९ ॥

पातकवर्जेषु यच्चाऽन्यदप्येवं युक्तं द्वादशाऽर्धमासान् द्वादश द्वादश प्राणायामान् धारयेत् ॥ १० ॥

अनु०—पातक अपराधों को छोड़कर अन्य अपराधो के लिए अर्धमास की बारह अवधि तक (अर्थात् छः मास) प्रति दिन बारह-बारह प्राणायाम करे ॥ १० ॥

यच्चाऽन्यदपीत्यनृतगमनाभ्यासो गृह्यते । तच्च महापातकातिदेशिकं कर्म । द्वादशाऽर्धमासाः षण्मासाः । सर्वत्र गुरुलघुनोस्सहोपादाने गुरुलघुनोरभ्यासापेक्षयैव मतिपूर्वाद्यपेक्षया वा निमित्तं द्रष्टव्यम् । अन्यथा विषमसमीकरणप्रसङ्गात् ॥ १० ॥

अथ पातकेषु संवत्सरं द्वादश द्वादश प्राणायामान् धारयेत् ॥ ११ ॥

अनु०—पातक अपराधों के लिए एक वर्ष तक प्रति दिन बारह-बारह प्राणायाम धारण करे ॥ ११ ॥

योगनिष्ठस्याऽमात्यान्तनिर्गुणब्राह्मणवधादावेव महापातकानि प्रसक्तानि । तेष्वेव भ्रूणहत्याऽप्यन्तर्भवति ॥ ११ ॥

ऋतुमत्याः कन्याया अप्रदाने भ्रूणहत्यातुल्यदोषो भवतीत्येतद्वक्तुकामः कन्यादानप्रकरणमारभते—

दद्याद्गुणवते कन्यां नग्निकां ब्रह्मचारिणे । अपि वा गुणहीनाय नोपरुन्ध्याद्रजस्वलाम् ॥ १२ ॥

अनु०—कन्या जब नंगी ही घूमती हो (अर्थात् लज्जा भाव से शून्य अत्यन्त अल्प अवस्था में हो) तभी गुणवान् ब्रह्मचारी को विवाह में देनी चाहिए अथवा गुणहीन व्यक्ति को भी विवाह में दे देना उचित है किन्तु उसके रजस्वला होने पर अपने घर में रखना उचित नहीं ॥ १२ ॥

गुणवते विद्याचारित्रबन्धुशीलसम्पन्नाय नग्निका वस्त्रपरिधानाभावेऽपि