भारतकोश
बेताल पच्चीसी

बेताल पच्चीसी

Betal Pachisi

महाकवि सोमदेव / बेताल भट्ट द्वारा

DevanagariHindipublished151 पृष्ठ

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अट्ठारहवां बेताल ब्राह्मणकुमार की कथा

उस भयानक रात में राजा विक्रमादित्य जब उस शिंशपा-वृक्ष के पास पहुंचा तो वहां का बदला दृश्य देखकर कुछ विस्मित-सा हो गया। श्मशान का समूचा क्षेत्र श्मशान की चिता की अग्नि और मांसभक्षी भूत-प्रेतों से भरा हुआ था, जिनकी जीभें आग की चंचल लपटों के समान जान पड़ती थीं।

वहां उसने बहुत से प्रेत-शरीरों को उल्टे लटका देखा, जो देखने में एक जैसे प्रतीत होते थे। यह देखकर भी राजा भयभीत न हुआ। वह मन-ही-मन सोचने लगा—‘अरे ! यह क्या बात है ? क्या वह मायावी बेताल इस प्रकार मेरा समय नष्ट कर रहा है ? समझ में नहीं आता इन बहुत-से शवों में से मैं किसको ले जाऊं ? यदि मेरा काम हुए बिना ही यह रात बीत गई तो फिर मरने के अतिरिक्त मेरे पास कोई अन्य उपाय नहीं बचेगा। तब मैं अग्नि में प्रवेश करके अपने प्राण दे दूंगा किंतु उपहास का पात्र कदापि नहीं बनूंगा।’

राजा जब ऐसा सोच रहा था, तब उसका यह निश्चय जानकर बेताल उसकी दृढ़ता से संतुष्ट हुआ और उसने अपनी माया समेट ली। तब राजा ने एक ही मनुष्य शरीर में बेताल को देखा। उसे वृक्ष से उतारकर राजा ने अपने कंधे पर डाला और वहां से प्रस्थान किया। चलते हुए राजा से वह बेताल फिर बोला—‘‘राजन, मुझे यह देखकर बहुत आश्चर्य हो रहा है कि न तो तुम ऊबते ही हो और न अपनी जिद छोड़ते हो। उस योगी के लिए तुम निश्चय ही बहुत परिश्रम कर रहे हो। सुनो, तुम्हारे श्रम की थकान दूर करने के लिए मैं तुम्हें फिर एक कथा सुनाता हूं। ’’

तब बेताल ने यह कथा सुनाई।

आर्यावर्त्त में उज्जायिनी नाम की एक नगरी है। नागों की भूमि भोगवती और देवों की भूमि अमरावती के बाद श्रेष्ठता में तीसरा स्थान उसी का है। माता गौरी ने कठिन तपस्या के बाद जब शिव का वरण किया था, तब इस नगरी के असाधारण गुणों से आकृष्ट होकर भगवान शिव ने इसी नगरी को अपना निवास स्थान बनाया था। पुण्य की अधिकता से प्राप्त होने वाले अनेक प्रकार के सुख-भोगों से वह नगरी भरी हुई है।

उस नगरी में चंद्रप्रभ नाम का एक राजा राज करता था। उसका मंत्री एक ब्राह्मण था, जिसका नाम था—देवस्वामी। देवस्वामी बहुत धनवान था, उसने बहुत से यज्ञ भी किए थे।

समय पाकर उसे चंद्रस्वामी नाम का एक पुत्र पैदा हुआ। यद्यपि उसने विद्याओं का अध्ययन किया था, फिर भी जवानी में उसे जुआ खेलने का व्यसन पैदा हो गया।

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