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बेताल पच्चीसी

बेताल पच्चीसी

Betal Pachisi

by महाकवि सोमदेव / बेताल भट्ट

DevanagariHindipublished151 pages

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द्वारा सम्मानित होकर जब वह भोजन करने बैठा, तो उसी समय एक बालक ने जोर-जोर से रोना शुरू कर दिया। बहुत बहलाने-समझाने पर भी जब बालक चुप न हुआ तो घर की मालकिन ने क्रुद्ध होकर उसे हाथों में उठा लिया और जलती हुई अग्नि में फेंक दिया। आग में गिरते ही, कोमल शरीर वाला वह बालक जलकर राख हो गया। यह देखकर उस योगी को रोमांच हो आया। उसने परोसे हुए भोजन को आगे सरका दिया और उठकर खड़ा होते हुए क्रोधित भाव में बोला—‘‘धिक्कार है आप लोगों पर। आप ब्राह्मण नहीं, कोई ब्रह्म-राक्षस हैं। अब मैं तुम्हारे घर का भोजन तो क्या, एक अन्न का दाना भी ग्रहण नहीं करूंगा। ’’

योगी के ऐसा कहने पर गृहस्वामी बोला—‘‘हे योगिराज, आप कुपित न हों। मैं बच्चे को फिर से जीवित कर लूंगा। मैं एक ऐसा मंत्र जानता हूं जिसके पढ़ने से मृत व्यक्ति जीवित हो जाता है। ’’

यह कहकर वह गृहस्थ, एक पुस्तक ले आया जिसमें मंत्र लिखा था। उसने मंत्र पढ़कर उससे अभिमंत्रित धूल आग में डाल दी। आग में धूल के पड़ते ही वह बालक जीवित होकर ज्यों-का-त्यों आग से निकल आया।

जब उस ब्राह्मण योगी का चित्त शांत हो गया तो उसने भोजन ग्रहण किया। गृहस्थ ने उस पुस्तिका को बांधकर खूंटी पर टांग दिया और भोजन करके योगी के साथ वहीं सो गया। गृहपति के सो जाने के पश्चात् वह योगी चुपचाप उठा और अपनी प्रिया को जीवित करने की इच्छा से उसने डरते-डरते वह पुस्तक खूंटी से उतार ली और चुपचाप बाहर निकल आया।

रात-दिन चलता हुआ, वह योगी उस जगह पहुंचा, जहां उसकी प्रिया का दाह हुआ था। वहां पहुंचते ही उसने उस दूसरे ब्राह्मण को देखा जो मंदारवती की अस्थियां लेकर गंगा में डालने गया था।

तब उस योगी ने उससे तथा उस पहले ब्राह्मण से, जिसने वहां कुटिया बना ली थी और चिता-भस्म से सेज रच रखी थी कहा कि—‘‘तुम यह कुटिया यहां से हटा लो जिससे मैं एक मंत्र शक्ति के द्वारा इस भस्म हुई मदारवती को जीवित करके उठा लूं। ’’

इस प्रकार उन्हें बहुत समझा-बुझाकर उसने वह कुटिया उजाड़ डाली। तब वह योगी पुस्तक खोलकर मंत्र पढ़ने लगा। उसने धूल को अभिमंत्रित करके चिता-भस्म में डाल दिया और मंदारवती उसमें से जीती-जागती निकल आई। अग्नि में प्रवेश करके निकलते हुए उसके शरीर की कांति पहले से भी अधिक तेज हो गई थी। उसका शरीर अब ऐसा लगने लगा था जैसे वह सोने का बना हुआ हो। इस प्रकार उसको जीवित देखकर वे तीनों ही काम-पीड़ित हो गए और उसको पाने के लिए आपस में लड़ने-झगड़ने लगे। जिस योगी ने मत्र से उसे जीवित किया था वह बोला कि वह स्त्री उसकी है। उसने उसे मंत्र-तंत्र से प्राप्त किया है। दूसरे ने कहा कि तीर्थों के प्रभाव से मिली वह उसकी भार्या है। तीसरा बोला कि उसकी भस्म को रखकर

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