भैषज्य रत्नावली (गोविन्ददास सेन - सान्वय भाषा टीका सहित)
Bhaishajya Ratnavali Hindi
कविराज गोविन्ददास सेन (टीकाकार: वैद्य शंकरलाल) द्वारा
स्रोत: Bhaishajya Ratnavali with Hindi Translation by Vaidya Shankar Lal (1942) (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें५४२ भैषज्यरत्नावली । [ पाण्डु-आदि- .
हो जाय तब उतारकर छानलेवे । यह घृत मृत्तिकाके खानेसे उत्पन्न हुए विकार एवं अन्यान्य सम्पूर्ण उपद्रवोंको शमन करता है ॥ ६ ॥ ७ ॥ पाण्डुरोगम पथ्य । छर्दिर्विरेचनं जीर्णयवगोधूमशालयः । मुद्गाढकमसूराणां यूषा जाङ्गलजा रसाः ॥ १०८ ॥ पटोलं वृद्धकूष्माण्डं तरुणं कदलीफलम् । जीवन्ती क्षुरमत्स्याक्षी गुडूची तण्डुलीयकम् ॥१०९॥ पुननवा द्रोणपुष्पी वार्त्ताकुलशुनद्वयम् । पक्काम्रमभया बिम्बी शृङ्गी मत्स्या गवां जलम् ॥११०॥ धात्री तक्रं घृतं तैलं सौवीरकतुषोदकम् । नवनीत गन्धसारो हरिद्रा नागकेशरम् ॥ १११ ॥ यवक्षारो लौहभस्म कषायाणि च कुंकुमम् । यथादोषमिदं पथ्य पाण्डुरोगवतां भवेत् ॥ ११२ ॥ वमन और विरेचन कराना, पुराने जा, गहू और शालिधानोंके चावल, मूँग, अरहर, मसूर इनका यूष और जाङ्गलदेशोत्पन्न जीवोंके मांसका रस, परवल, पका-पेठा, कच्चा केला, जीवन्तीका शाक, तालमखानक पत्तोंका शाक, मछैछीका शाक, गिलोय, चौलाईका शाक, पुनर्नवा, गूमा, बैंगन, प्याज, लहसुन, पका आम, हरड, कन्दूरी, शृंगवाली मछली, गोमूत्र, आमले मट्ठा, घृत, तैल, सौवीरक और तुषोदक नामकी काँजी, मक्खन (नैनीघी,) लाल चन्दन, हल्दी, नागकेशर, जवाखार, लोहभस्म, केशर आर कषायरसवाले पदार्थ ये सब पाण्डुरोगियोंको यथादोषानुसार पथ्य हैं ॥ ८-११२ ॥
पांडुरोगमें अपथ्य । रक्तस्रुतिर्धूमपान वमिवेगविधारणम् । स्वेदनं मैथुनं शिम्बी पत्रशाकानि रामठम् ॥ ११३ ॥ माषोऽम्बुपानं पिण्याकस्ताम्बूलं सर्षपाः सुरा । मृद्भक्षणं दिवास्वप्रस्तीक्ष्णानि लवणानि च ॥ ११४ ॥ सह्यविन्ध्याद्रिजातानां नदीनां सलिलानि च । गुर्वन्नं च विदाहीनि पाण्डुरोगेऽहितं भवेत् ॥ ११५ ॥