भावप्रकाश: चिकित्सा भाग (भावमिश्र - विद्योतिनी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सम्पूर्ण कायचिकित्सा)
Bhavaprakasha Chikitsa Bhaga with Vidyotini Commentary
आचार्य भावमिश्र (टीकाकार: पं. ब्रह्मशंकर मिश्र एवं रूपलालजी वैश्य) द्वारा
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भाव प्रकाश:
प्रथम भाग
पृष्ठ १. आयुर्वेदप्रवक्तृप्रादुर्भाव प्रकरण १-९ आयुर्वेद की निरुक्ति तथा प्रादुर्भाव । २. सृष्टि प्रकरण १०-१९ सृष्टिक्रम, प्रकृतिस्वरूपनिर्णय, प्रकृति-पुरुष का साधर्म्य—वैधर्म्य, सात्त्विक—राजस—तामस—प्रकृति के लक्षण, सप्तविध प्रकृतिस्वरूप निरूपण । ३. गर्भ प्रकरण २०-९६ रजस्वला का स्वरूप, नियम तथा कर्तव्याकर्तव्य । गर्भावतरणक्रम । गर्भस्थ स्त्री, पुरुष वा नपुंसक सन्तान के लक्षण, निदान तथा वातादि दोषत्रय का स्वरूपनिरूपण एवं गर्भस्थ सन्तान के रस-रक्त-मांस-मेदादि के वृद्धिक्रम तथा लक्षण आदि का विशद वर्णन, प्रसवमास की संख्या, सूतिकागृहनिर्माणप्रकार तथा आसन्नप्रसवा का लक्षण । ४. बाल प्रकरण ९७-१०८ सन्तानोत्पत्त्यनन्तर कर्तव्य, धातृस्वरूप वर्णन, शिशुपरिचर्या, वातादिप्रकृतिक शिशुलक्षण । ५. दिनचर्यादि प्रकरण १०९-१६२ आनूपादि देशनिरूपण, दिनचर्या, रात्रिचर्या तथा वसन्तादि षट् ऋतुओं का वर्णन । ६. मिश्र प्रकरण १६३-२०४ रोग की साध्यासाध्यता, चिकित्सा, रोगी, वैद्य तथा दूत के लक्षण, आयु-विचार, दीर्घायु स्वल्पायु रोगी के लक्षण तथा औषध-परीक्षादि ।