भारतकोश
भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary

महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा

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३४१ (छ) 'तुला' राशि पर हो तो संख्या ८४८ (ज) 'वृश्चिक' राशि पर हो तो संख्या ८४९ (झ) 'धनु' राशि पर हो तो संख्या ८५० (ञ) 'मकर' राशि पर हो तो संख्या ८५१ (ट) 'कुम्भ' राशि पर हो तो संख्या ८५२ (ठ) 'मीन' राशि पर हो तो संख्या ८५३ 'तुला' लग्न में 'राहु' का फलादेश १. 'तुला' लग्न वालों की अपनी जन्मकुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'राहु' का स्थायी फलादेश उदाहरण-कुण्डली संख्या ८५४ से ८६५ के बीच देखना चाहिए। २. 'तुला' लग्न वालों को गोचर-कुण्डली के विभिन्न भागों में स्थित 'राहु' का अस्थायी फलादेश निम्नलिखित उदाहरण-कुण्डलियों में देखना चाहिए— जिस वर्ष में 'राहु'— (क) 'मेष' राशि पर हो तो संख्या ८५४ (ख) 'वृष' राशि पर हो तो संख्या ८५५ (ग) 'मिथुन' राशि पर हो तो संख्या ८५६ (घ) 'कर्क' राशि पर हो तो संख्या ८५७ (ङ) 'सिंह' राशि पर हो तो संख्या ८५८ (च) 'कन्या' राशि पर हो तो संख्या ८५६ (छ) 'तुला' राशि पर हो तो संख्या ८६० (ज) 'वृश्चिक' राशि पर हो तो संख्या ८६१ (झ) 'धनु' राशि पर हो तो संख्या ८६२ (ञ) 'मकर' राशि पर हो तो संख्या ८६३ (ट) 'कुम्भ' राशि पर हो तो संख्या ८६४ (ठ) 'मीन' राशि पर हो तो संख्या ८६५ 'वृष' लग्न में 'केतु' का फलादेश १. 'तुला' लग्न वालों को अपनी जन्म-कुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'केतु' का स्थायी फलादेश उदाहरण-कुण्डली संख्या ८६६ से ८७७ के बीच देखना चाहिए। २. 'तुला' लग्न वालों को गोचर-कुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'केतु'