भारतकोश
वेदान्त दर्शन: ब्रह्मसूत्र (शाङ्करभाष्य व हिन्दी अनुवाद सहित)

वेदान्त दर्शन: ब्रह्मसूत्र (शाङ्करभाष्य व हिन्दी अनुवाद सहित)

Vedanta Darshana: Brahma Sutra with Shankara Bhashya

भगवान् बादरायण व्यास व आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished486 पृष्ठ

पृष्ठ 125, कुल 486 में से

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पृष्ठ 125

१२२ वेदान्त-दर्शन [ पाद ४ प्राणादयो वाक्यशेषात् ॥ १ । ४ । १२ ॥ वाक्यशेषात्=बादवाले मन्त्रमें कहे हुए वाक्यसे; प्राणादयः=(यहाँ) प्राण और इन्द्रियाँ ही ग्रहण करनेयोग्य हैं। व्याख्या-उपर्युक्त मन्त्रके बाद आया हुआ मन्त्र इस प्रकार है- ‘प्राणस्य प्राणमुत चक्षुषश्चक्षुरुत श्रोत्रस्य श्रोत्रं मनसो ये मनो विदुः। ते निचिक्युर्ब्रह्म पुराणमग्र्यम् ॥' (४।४। १८) अर्थात् 'जो विद्वान् उस प्राणके प्राण, चक्षुके चक्षु, श्रोत्रके श्रोत्र तथा मनके भी मनको जानते हैं; वे उस आदि पुराण-पुरुष परमेश्वरको जानते हैं।' इस वर्णनसे यह सिद्ध होता है कि पूर्वमन्त्रमें ‘पञ्च पञ्चजनाः' पदोंके द्वारा पंच प्राण, पंच ज्ञानेन्द्रिय, पंच कर्मेन्द्रिय, मन तथा बुद्धि आदि परमेश्वरकी कार्यशक्तियोंका ही वर्णन है; क्योंकि उस ब्रह्मको ही उक्त मन्त्रमें प्राणका प्राण' चक्षुका चक्षु, श्रोत्रका श्रोत्र तथा मनका भी मन कहा गया है। इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि उस परब्रह्मके सम्बन्धसे ही प्राण आदि अपना कार्य करनेमें समर्थ होते हैं, इसलिये यहाँ इनके रूपमें उसीकी शक्तिविशेषका विस्तार बताया गया है। सम्बन्ध - "माध्यन्दिनी शाखावालोंके पाठके अनुसार 'प्राणस्य प्राणम्' इत्यादि मन्त्रमें अन्नका भी वर्णन होनेसे प्राण, चक्षु, श्रोत्र, मन और अन्नको लेकर पाँचकी संख्या पूर्ण हो जाती है; परंतु काण्वशाखाके मन्त्रमें 'अन्न' का वर्णन नहीं है; अतः वहाँ उस परमेश्वरकी पंचविध कार्यशक्तियोंकी संख्या कैसे पूरी होगी ?'' ऐसी जिज्ञासा होनेपर कहते हैं- ज्योतिषैकेषामसत्यन्ने ॥ १ । ४ । १३ ॥ एकेषाम् = एक शाखावालोंके पाठमें; अन्ने = अन्नका वर्णन; असति = न होनेपर; ज्योतिषा = पूर्ववर्णित 'ज्योतिष' के द्वारा (संख्यापूर्ति की जा सकती है)। व्याख्या- 'माध्यन्दिनी' शाखावालोंके पाठके अनुसार इस मन्त्रमें ब्रह्मको 'प्राणका प्राण' आदि बताते हुए 'अन्नका अन्न' भी कहा गया है। अतः उनके पाठानुसार यहाँ पाँचकी संख्या पूर्ण हो जाती है। परंतु काण्वशाखा-