भारतकोश
बृहदारण्यकोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

बृहदारण्यकोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

Brihadaranyaka Upanishad with Shankara Bhashya

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,402 पृष्ठ

पृष्ठ 1126, कुल 1402 में से

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पृष्ठ 1126
१११२बृहदारण्यकोपनिषद्[ अध्याय ४

| वादापेक्षम्, सकृच्छ्रुतं स्यात्; <br><br> तस्माद् भ्रान्तिरेवैषा—लोकस्तुतिपरमिति । <br><br> न च अनुष्ठेयेन पारिव्राज्येन स्तुतिरुपपद्यते । यदि पारिव्राज्यमनुष्ठेयमपि सदन्यस्तुत्यर्थं स्यात्, दर्शपूर्णमासादीनामप्यनुष्ठेयानां स्तुत्यर्थता स्यात् । न चान्यत्र कर्तव्यतैतस्माद् विषयान्निर्ज्ञाता, यत इह स्तुत्यर्थो भवेत् । यदि पुनः क्वचिद् विधिः | अर्थवादकी अपेक्षा भी है।¹ यदि इसका श्रुतिमें एक ही बार श्रवण होता तो यह अविवक्षित एवं स्तुतिपरक माना जाता, पर इसका तो अनेकों बार श्रवण हुआ है। अतः यह आत्मलोककी स्तुतिके लिये है—ऐसा विचार भ्रान्ति ही है। <br><br> अनुष्ठान करने योग्य पारिव्राज्यसे किसीकी स्तुति नहीं हो सकती। यदि अनुष्ठानके योग्य होकर भी पारिव्राज्य दूसरेकी स्तुतिके लिये हो सकता है, तो दर्श-पूर्णमासादि अनुष्ठेय कर्म भी स्तुतिके लिये ही सिद्ध होंगे। इस आत्मज्ञानरूप विषयको छोड़कर और कहीं इसकी कर्तव्यता नहीं ज्ञात हुई, जिससे कि यहाँ यह स्तुत्यर्थक हो। यदि कहीं पारिव्राज्य |


'प्रव्रजन्ति' में किसी भी प्रकारके अर्थवादकी सम्भावना नहीं है। इसीका यहाँ बार-बार समर्थन किया गया है। 'प्रमाणान्तरसे प्राप्तके समान' ऐसा कहकर यहाँ अनुवादरूप अर्थवादका खण्डन किया गया है। जैसे 'वायुर्वै क्षेपिष्ठा देवता' (वायु शीघ्र चलनेवाला देवता है) यह एक वाक्य है। वायुका शीघ्रगामी होना प्रत्यक्ष प्रमाणसे सिद्ध है। अतः यह अनुवादमात्र होनेके कारण अर्थवाद है। परंतु उसके समान 'प्रव्रजन्ति' (संन्यास लेते हैं) यह वचन किसीकी स्तुति करने-वाला नहीं है; क्योंकि यह अन्य प्रमाणोंसे ज्ञात नहीं है।

१. इसके सिवा जो प्रधान कर्म होते हैं, उन्हींकी फलादिके द्वारा स्तुति की जाती है, वे स्वयं किसीकी स्तुति नहीं होते; जैसे दर्श-पूर्णमासादि प्रधान कर्मोंकी उनके फल स्वर्गप्राप्ति आदिसे स्तुति की जाती है, उसी प्रकार पारिव्राज्यकी भी आत्मलोकप्राप्तिद्वारा स्तुति की गयी है और यह स्वयं किसीकी स्तुति नहीं करता। इससे भी इसका अर्थवाद होना सम्भव नहीं है।