बृहदारण्यकोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

बृहदारण्यकोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)
Brihadaranyaka Upanishad with Shankara Bhashya
आदि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished1,402 पृष्ठ
पृष्ठ 1389, कुल 1402 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 1389
( १३७३ )
| मन्त्रप्रतीकानि | अ० | ब्रा० | मं० | पृष्ठ |
|---|---|---|---|---|
| तदेतत्प्रेयः पुत्रात्प्रेयो ... | १ | ४ | ८ | २३६ |
| तदेतदृचाभ्युक्तम् । एष ... | ४ | ४ | २३ | १११७ |
| तदेतद्ब्रह्म क्षत्रं विट्० ... | १ | ४ | १५ | २६४ |
| तदेतन्मूर्तं यदन्यत् ... | २ | ३ | २ | ५१५ |
| तदेतेश्लोकाभवन्ति।अणुःपन्था विततः | ४ | ४ | ८ | १०७० |
| तदेते···स्वप्नेन ... | ४ | ३ | ११ | ६३५ |
| तदेष श्लोको भवति । अर्वाग्बिलश्चमस | २ | ३ | ३ | ५०८ |
| तदेष···तदेव सक्तः सह ... | ४ | ४ | ६ | १०४८ |
| तदेष···यदा सर्वे ... | ४ | ४ | ७ | १०६५ |
| तद्धापि ब्रह्मदत्तश्चैकिता० ... | १ | ३ | २४ | १४८ |
| तद्धेदं तर्ह्यव्याकृतमासीत् ... | १ | ४ | ७ | १६१ |
| तद् यत्तत्सत्यमसौ ... | ५ | ५ | २ | ११६७ |
| तद् यथा तृणजलायुका ... | ४ | ४ | ३ | १०३७ |
| तद् यथानः सुसमाहित० ... | ४ | ३ | ३५ | १०१४ |
| तद् यथा पेशस्कारी पेश० ... | ४ | ४ | ४ | १०३६ |
| तद् यथा महामत्स्य उभे ... | ४ | ३ | १८ | ६५६ |
| तद् यथा राजानमायान्त० ... | ४ | ३ | ३७ | १०२१ |
| तद् यथा राजानं प्रयि० ... | ४ | ३ | ३८ | १०२३ |
| तद् यथास्मिन्नाकाशे ... | ४ | ३ | १९ | ६५६ |
| तद्वा अस्यैतदतिच्छन्दा ... | ४ | ३ | २१ | ६६८ |
| तद्वा एतदक्षरं गार्ग्यदृष्टं ... | ३ | ८ | ११ | ७७८ |
| तद्वै तदेतदेव ... | ५ | ४ | १ | ११६१ |
| तम एव यस्यायतनं ... | ३ | ९ | १४ | ८०० |
| तमेताः समाक्षितय ... | २ | २ | २ | ५०६ |
| तमेव धीरो विज्ञाय ... | ४ | ४ | २१ | १०६१ |
| तस्मिञ्छुक्लमुत नीलमाहुः ... | ४ | ४ | ९ | १०७३ |
| तस्य प्राची दिक्प्राञ्चः ... | ४ | २ | ४ | ८६५ |
| तस्य वा एतस्य पुरुषस्य ... | ४ | ३ | ९ | ६२३ |
| तस्य हैतस्य पुरुषस्य ... | २ | ३ | ६ | ५२४ |
| तस्य हैतस्य साम्नो यः प्रतिष्ठां वेद | १ | ३ | २७ | १५४ |
| तस्य ॰॰सुवर्णं वेद . ... | १ | ३ | २६ | १५३ |
| तस्य···स्वं वेद ... | १ | ३ | २५ | १५० |
| तस्या उपस्थानं गायत्र्य० ... | ५ | १४ | ७ | १२३६ |
| तस्या वेदिरुपस्थो ... | ६ | ४ | ३ | १३३८ |