बृहदारण्यकोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

बृहदारण्यकोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)
Brihadaranyaka Upanishad with Shankara Bhashya
आदि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished1,402 पृष्ठ
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( १३७६ )
| मन्त्रप्रतीकानि | अ० | ब्रा० | मं० | पृष्ठ |
|---|---|---|---|---|
| यदेव ते....सत्यकामो ... | ४ | १ | ६ | ८५३ |
| यदैतमनुपश्यत्यात्मानं ... | ४ | ४ | १५ | १०८४ |
| यद् वृक्षो वृक्णो रोहति ... | ३ | ९ | ४-२८ | ८२७ |
| यद्वै तन्न जिघ्रति जिघ्रन् वै ... | ४ | ३ | २४ | ६६२ |
| यद्वै तन्न पश्यति पश्य० ... | ४ | ३ | २३ | ६८६ |
| यद्वै तन्न मनुते ... | ४ | ३ | २८ | ६६२ |
| यद्वै तन्न रसयते ... | ४ | ३ | २५ | ६६२ |
| यद्वै तन्न वदति ... | ४ | ३ | २६ | ६६२ |
| यद्वै तन्न विजानाति ... | ४ | ३ | ३० | ६६२ |
| यद्वै तन्न शृणोति ... | ४ | ३ | २७ | ६६२ |
| यद्वै तन्न स्पृशति ... | ४ | ३ | २९ | ६६२ |
| यश्चक्षुषी तिष्ठं ... | ३ | ७ | १८ | ७५४ |
| यश्चन्द्रतारके ... | ३ | ७ | ११ | ७५१ |
| यस्तिमसि तिष्ठं ... | ३ | ७ | १३ | ७५१ |
| यस्तेजसि तिष्ठं ... | ३ | ७ | १४ | ७५२ |
| यस्त्वचि तिष्ठं ... | ३ | ७ | २१ | ७५४ |
| यस्मादर्वाक्संवत्सरो० ... | ४ | ४ | १६ | १०८५ |
| यस्मिन्पञ्च पञ्चजना ... | ४ | ४ | १७ | १०८६ |
| यस्यानुवित्तः प्रतिबुद्ध ... | ४ | ४ | १३ | १०८० |
| याज्ञवल्क्य किंज्योतिरयं ... | ४ | ३ | २ | ८७१ |
| याज्ञवल्क्याद्याज्ञवल्क्य ... | ६ | ५ | ३ | १३६३ |
| याज्ञवल्क्येति होवाच कतिभिरयमद्य ब्रह्मा .... | ३ | १ | ६ | ६४१ |
| याज्ञवल्क्येति...ऋग्भिः ... | ३ | १ | ७ | ६४७ |
| याज्ञवल्क्येति...कत्ययमद्याध्वर्युरस्मिन् | ३ | १ | ८ | ६३८ |
| याज्ञवल्क्येति...द्योद्गाता० ... | ३ | १ | १० | ६४४ |
| याज्ञवल्क्येति....यत्रायं पुरुषो म्रियत | ३ | २ | ११ | ६६० |
| याज्ञवल्क्येति...म्रियते ... | ३ | २ | १२ | ६६२ |
| याज्ञवल्क्येति....यत्रास्य पुरुषस्य | ३ | २ | १३ | ६६७ |
| याज्ञवल्क्येति...यदिदमन्तरिक्षं ... | ३ | १ | ६ | ६३३ |
| याज्ञवल्क्येति...सर्वमहोरात्राभ्यां | ३ | १ | ४ | ६२६ |
| याज्ञवल्क्येति...मृत्युना० ... | ३ | १ | ३ | ६२५ |
| याज्ञवल्क्येति...मृत्योरन्नं ... | ३ | २ | १० | ६५८ |
| याज्ञवल्क्येति पूर्वपक्षा० ... | ३ | १ | ५ | ६३१ |
| याज्ञवल्क्येति होवाच शाकल्यो ... | ३ | ९ | १६ | ८०५ |