भारतकोश
छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

Chandogya Upanishad with Shankara Bhashya

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished978 पृष्ठ

पृष्ठ 102, कुल 978 में से

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पृष्ठ 102

सप्तम खण्ड

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अध्यात्म-उद्गीथोपासना

अथाध्यात्मं वागेवर्क्प्राणः साम तदेतदेतस्यामृच्यध्यूढꣳसाम तस्मादृच्यध्यूढꣳसाम गीयते । वागेव सा प्राणोऽमस्तत्साम ॥ १ ॥

इससे आगे अध्यात्म उपासना है—वाणी ही ऋक् है और प्राण साम है। इस प्रकार इस [वाक्रूप] ऋक्में [प्राणरूप] साम अधिष्ठित है। अतः ऋक्में अधिष्ठित सामका ही गान किया जाता है। वाक् ही 'सा' है और प्राण 'अम' है। इस प्रकार ये [दोनों मिलकर] साम हैं ॥ १ ॥

| अथाधुनाध्यात्ममुच्यते—वागेवर्क्प्राणः साम, अधरोपरिस्थानत्वसामान्यात् । प्राणो घ्राणमुच्यते सह वायुना। वागेव सा प्राणोऽम इत्यादि पूर्ववत् ॥ १ ॥ | आधिदैविक उपासनाके पश्चात् अब अध्यात्म उपासनाका वर्णन किया जाता है—नीचे-ऊपर स्थान होनेमें तुल्य होनेके कारण वाक् ही ऋक् है और प्राण साम है। वायुके सहित घ्राणेन्द्रिय ही यहाँ प्राण कहा गया है। वाक् ही 'सा' है और प्राण 'अम' है इत्यादि कथन पूर्ववत् समझना चाहिये ॥ १ ॥ |

चक्षुरेवर्गात्मा साम तदेतदेतस्यामृच्यध्यूढꣳसाम तस्मादृच्यध्यूढꣳसाम गीयते । चक्षुरेव सात्मामस्तत्साम ॥ २ ॥