भारतकोश
छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

Chandogya Upanishad with Shankara Bhashya

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished978 पृष्ठ

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पृष्ठ 142

द्वादश खण्ड

शौवसामसम्बन्धी उपाख्यान

अथातः शौव उद्गीथस्तद्ध बको दाल्भ्यो ग्लावो वा मैत्रेयः स्वाध्यायमुद्वव्राज ॥ १ ॥

तदनन्तर अब [अन्नलाभके लिये अपेक्षित] शौव उद्गीथका आरम्भ किया जाता है। वहाँ प्रसिद्ध है कि [पूर्वकालमें] दल्भका पुत्र बक अथवा मित्राका पुत्र ग्लाव स्वाध्यायके लिये [गाँवके बाहर] जलाशयके समीप गया ॥ १ ॥

[शौवोद्गीथोपदेश-प्रयोजनम्] अतीते खण्डेऽन्नाप्राप्तिनिमित्ता कष्टावस्थोक्तोच्छिष्टपर्युषितभक्षणलक्षणा सा मा भूदित्यन्नाभाय अथानन्तरं शौवः श्वभिर्दृष्ट उद्गीथ उद्गानं सामातः प्रस्तूयते । <br><br> तत्तत्र ह किल बको नामतो दल्भस्यापत्यं दाल्भ्यो ग्लावो वा नामतो मित्रायाश्चापत्यं मैत्रेयः। वाशब्दश्चार्थे द्वयामुष्या-अतीत खण्डमें अन्नकी अप्राप्तिसे होनेवाली उच्छिष्ट और पर्युषित (बासी) अन्नभक्षणरूप कष्टमयी अवस्थाका वर्णन किया गया था, वैसी अवस्थाकी प्राप्ति न हो— इसलिये अब इससे आगे अन्न-प्राप्तिके लिये शौव—श्वानोंद्वारा देखे हुए उद्गीथ—उद्गान साम-का आरम्भ किया जाता है। <br><br> यहाँ प्रसिद्ध है कि बकनामक दाल्भ्य—दल्भका पुत्र अथवा ग्लाव-नामक मैत्रेय—मित्राका पुत्र स्वाध्याय करनेके लिये ग्रामसे बाहर 'उद्वव्राज' एकान्त देशमें स्थित जलाशयके समीप गया। यहाँ 'वा' शब्द 'च'