भारतकोश
छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

Chandogya Upanishad with Shankara Bhashya

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished978 पृष्ठ

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पृष्ठ 461

खण्ड १ ] शाङ्करभाष्यार्थ ४५७


| तथा च श्रुतिः कौषीतकिनाम्; "जीवति वागपेतो मूकान्हि पश्यामो जीवति चक्षुरपेतोऽन्धान्हि पश्यामो जीवति श्रोत्रापेतो बधिरान्हि पश्यामो जीवति मनोऽपेतो बालान्हि पश्यामो जीवति बाहुच्छिन्नो जीवत्यूरुच्छिन्न": ( कौ० उ० ३ । ३ ) इत्याद्या ॥ १५ ॥ | ऐसी ही कौषीतकिब्राह्मणोपनिषद्की श्रुति भी है—"मनुष्य बिना वाणीके जीवित रहता है, क्योंकि हम गूँगोंको देखते हैं; नेत्रके बिना जीवित रहता है, क्योंकि हम अन्धोंको देखते हैं; श्रोत्रके बिना जीवित रहता है, क्योंकि हम बहरोंको देखते हैं; मनके बिना जीवित रहता है, क्योंकि हम बालकोंको देखते हैं तथा भुजा कट जानेपर जीवित रहता है, ऊरु ( जाँघ ) कट जानेपर जीवित रहता है" इत्यादि ॥ १५ ॥ |

इतिच्छान्दोग्योपनिषदि पञ्चमाध्याये
प्रथमखण्डभाष्यं सम्पूर्णम् ॥ १ ॥