भारतकोश
छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

Chandogya Upanishad with Shankara Bhashya

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished978 पृष्ठ

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पृष्ठ 671

खण्ड ९ ] शाङ्करभाष्यार्थ ६६७


| जानाति स्वगृहादागतोऽस्मी- | जानेपर यह जानता है कि मैं अपने | | त्येवं सत आगतोऽस्मीति च | घरसे आया हूँ, इसी प्रकार जीवोंको | | जन्तूनां कस्माद्विज्ञानं न भव- | ऐसा ज्ञान क्यों नहीं होता कि मैं | | तीति भूय एव मा भगवान्वि- | सत्‌के पाससे आया हूँ, अतः हे | | ज्ञापयत्वित्युक्तस्तथा सोम्येति | भगवन् ! मुझे फिर समझाइये । | | होवाच पिता ॥ ४ ॥ | इस प्रकार कहे जानेपर पिताने कहा—'सोम्य ! अच्छा' ॥४॥ |

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इतिच्छान्दोग्योपनिषदि षष्ठाध्याये नवमखण्डभाष्यं सम्पूर्णम् ॥ ९ ॥