छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)
Chandogya Upanishad with Shankara Bhashya
आदि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished978 पृष्ठ
पृष्ठ 957, कुल 978 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 957
( ९५३ )
| मन्त्रप्रतीकानि | अ० | खं० | मं० | पृष्ठ | |
|---|---|---|---|---|---|
| अथातः शौव उद्गीथः | ... | १ | १२ | १ | १३८ |
| अथाधिदैवतं य एवासौ | ... | १ | ३ | १ | ६४ |
| अथाध्यात्मं प्राणो वाव | .... | ४ | ३ | ३ | ३७१ |
| अथाध्यात्मं य एवायम् | .... | १ | ५ | ३ | ८५ |
| अथाध्यात्मं वागेवक्प्राणः | .... | १ | ७ | १ | ९८ |
| अथानु किमनुशिष्टः | .... | ५ | ३ | ४ | ४७५ |
| अथानेनैव ये चैतस्मात् | .... | १ | ७ | ८ | १०४ |
| अथावृत्तेषु यौर्हिङ्कारः | ... | २ | २ | २ | १५७ |
| अथैतयोः पथोर्न कतरेण | .... | ५ | १० | ८ | ५३१ |
| अथोताप्याहुः | .... | २ | १ | ३ | १५२ |
| अधीहि भगव इति | .... | ७ | १ | १ | ७१२ |
| अनिरुक्तस्त्रयोदशः | ... | १ | १३ | ३ | १४७ |
| अन्तरिक्षमेवग्वायुः | .... | १ | ६ | २ | ९१ |
| अन्तरिक्षोदरः कोशः | .... | ३ | १५ | १ | ३१७ |
| अन्नं वाव बलाद्भूयः | .... | ७ | ९ | १ | ७४९ |
| अन्नमयँ॒ हि सोम्य | ... | ६ | ५ | ४ | ६२६ |
| ,, ,, | ... | ६ | ६ | ५ | ६३१ |
| अन्नमशितं त्रेधा विधीयते | .... | ६ | ५ | १ | ६२३ |
| अन्नमिति होवाच | .... | १ | ११ | ९ | १३६ |
| अन्यतरामेव वर्तनीम् | .... | ४ | १६ | ३ | ४३० |
| अपां का गतिरित्यसौ | .... | १ | ८ | ५ | १११ |
| अपाँ॒ सोम्य पीयमानानाम् | .... | ६ | ६ | ३ | ६३० |
| अपाने तृप्यति वाक्तृप्यति | .... | ५ | २१ | २ | ५६६ |
| अभिमन्थति स हिङ्कारः | ... | २ | १२ | १ | १८९ |
| अभ्रं भूत्वा मेघो भवति | ... | ५ | १० | ६ | ५२१ |
| अभ्राणि संप्लवन्ते | .... | २ | १५ | १ | १९४ |
| अमृतत्वं देवेभ्यः | .... | २ | २२ | २ | २१० |
| अयं वाव लोकः | .... | १ | १३ | १ | १४४ |
| अयं वाव स योऽयमन्तः | .... | ३ | १२ | ८ | २८५ |
| अयं वाव स योऽयमन्तर्हृदये | .... | ३ | १२ | ९ | २८५ |
| अरिष्टं कोशम् | .... | ३ | १५ | ३ | ३२० |
| अशनापिपासे मे सोम्य | .... | ६ | ८ | ३ | ६४८ |