चरक संहिता (प्रथम भाग: सूत्र, निदान, विमान, शारीर व इन्द्रिय स्थान)
Charaka Samhita Part 1 with Hindi Translation
महर्षि चरक व अग्निवेश द्वारा
स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन (उद्गम)
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[बायाँ स्तम्भ]
अहित आहार। हित और अहित उप- योगी द्रव्य। श्रेष्ठ द्रव्य। श्रेष्ठ का लक्षण। द्रव्यों के नौ उत्पत्ति स्थान। उपसंहार ! षड्विंशोऽध्यायः (पृ० २६१-३२२) आत्रेयभद्रकाप्यीयः—ऋषि संवाद ! रस के विषय में भद्रकाप्य का मत रस एक है ब्राह्मण शाकुन्तेय का मत रस दो हैं पूर्णाक्ष मौद्गल्य का मत रस तीन हैं हिरण्याक्ष कौशिक का मत रस चार होते हैं कुमारशिरा भरद्वाज का मत रस पांच हैं। वार्योविद का मत रस छः हैं वैदेह निमि का मत रस सात हैं धामागंव वडिश का मत रस आठ हैं बाल्हीक भिषक् कांकायन का मत रस अगणित हैं। पुनर्वसु आत्रेय का मत रस छः हैं रसों की उत्पत्ति, कर्म, रुचि और प्रभाव। रस विवेचन। द्रव्यों के भेद उनके कर्म। कर्म, वीर्य, काल, अधिकरण, उपाय, तथा फल के लक्षण। द्रव्य, देश, काल, प्रभाव से द्रव्यों के ६३ भेद। रसों के भेद, दो दो रस के १५ भेद। तीन २ रसों के बीस भेद। चार चार रसों के १५ भेद। पांच २ रसों के छः भेद। एक २ रस के छः भेद, सर्वयोग ६३ रस। वैद्यप्रशंसा। अनुरस। अतिरिक्त दश गुण। इनके लक्षण। रसों की उत्पत्ति। रसों के अनुसार द्रव्यों के गुण कर्म। मधुर रस। अम्ल रस। लवण रस। बहुत उपयोग से हानियां। कटु रस के गुण अति सेवन
[दायाँ स्तम्भ]
से हानियां। तिक्त रस के गुण उसके अति सेवन से हानियां। कषाय रस के गुण और उसके अति सेवन से हानियां। रसानुसारी द्रव्यों का वीर्य। रसों में तर-तमयोग। विपाक। पदार्थों के वीर्य ८ प्रकार के। विपाक का लक्षण, प्रभाव। छः रसों के लक्षण। विरोधी आहारों के लक्षण उनके गुण दोष हितकारी अन्न। कालविरुद्ध, देशविरुद्ध अग्निविरोधी, परस्परविरोधी, सात्म्य- विरोधी, दोषविरोधी, संस्कारविरुद्ध, वीर्यविरोधी, कोष्ठविरोधी, अवस्थाविरुद्ध क्रमविरुद्ध, परिहारविरोधी, पाकविरोधी, संयोगविरोधी, सम्पद्विरुद्ध, और शास्त्र- विरुद्ध आहारों का वर्णन। विरोधी अन्न सेवन से रोगों की उत्पत्ति। विरुद्ध अन्न सेवन से उत्पन्न रोगों का प्रति- कार। उपसंहार। सप्तविंशोऽध्यायः (पृ० ३२२-३७४) अन्नपानविधिः—प्राणरूप अन्न का स्वरूप। प्राणों का मूल जाठराग्नि अन्न इन्धन-अन्नपान विधि का विस्तार से वर्णन। जल, क्षार, घृत, दूध, मद्य, सिरका, फाणित, पिण्याक, दालें, मधु आदि के सामान्य गुण दोष। आहार पदार्थों के १२ वर्ग शूकधान्यवर्ग। शमीधान्यवर्ग। मांसवर्ग। बिलेशय वारिशय जलचर जंगलीसूग बिकिर प्रतुद प्रसह और आनूप ये मांस के आठ उत्पत्ति स्थान। इन मांसों के गुण। शाकवर्ग। फलवर्ग। हरितवर्ग। मद्यवर्ग। जलबर्ग। दुग्धवर्ग। इक्षु-