भारतकोश
चरक संहिता (प्रथम भाग: सूत्र, निदान, विमान, शारीर व इन्द्रिय स्थान)

चरक संहिता (प्रथम भाग: सूत्र, निदान, विमान, शारीर व इन्द्रिय स्थान)

Charaka Samhita Part 1 with Hindi Translation

महर्षि चरक व अग्निवेश द्वारा

स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished639 पृष्ठ

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[Column 1] वर्ग। कृतान्नवर्ग। आहारयोनिवर्ग। प्रशस्त धान्य। त्याज्य मांस। त्याज्य शाक। अनुपान। उनके गुण। जल के अनुपान के अयोग्य व्यक्ति। खाद्य पदार्थों में गुरु लघु विचार। उपसंहार। अष्टाविंशोऽध्यायः (पृ० ३७४-३८५) विविधाशितपीतीयः—शरीर के सब धातुओं का अन्न से सम्बन्ध। आहार से उत्पन्न तीन पदार्थ रस, किट्ट और मल हिताहित आहार और रोग एवं आरोग्यविषयक अग्निवेश का प्रश्न आत्रेय पुनर्वसु का समाधान। धातु गत रोग-रसजन्य रोग। रक्तजन्य, मांसजन्य, मेदजन्य, मज्जाजन्य और शुक्रजन्य रोग। अपथ्याहार से मलों का प्रकोप। धातुजन्य विकारों की चिकित्साओं का निर्देश। उपसंहार। इयच्चान्नपानमुक्तम् ॥ एकोनत्रिंशोऽध्यायः (पृ० ३८५-३६०) दश प्राणायतनीयः—प्राण के दश स्थान। प्राणाभिसर वैद्य के लक्षण। रोगाभिसर वैद्य के लक्षण। छद्मवेषी वैद्यों का वर्णन। उपसंहार। त्रिंशत्तमोऽध्यायः (पृ० ३६१-४०७) अर्थे दशमहामूलीयः—हृदय में आश्रित दस धमनियां। हृदय के पर्याय। हृदय का महत्त्व। दस महामूल धम- नियों का प्रतान। धमनी के पर्याय। सेवन योग्य पदार्थ। आयुर्वेद के ज्ञाता के लक्षण। वाक्यार्थ 'अर्थावयवशः निरूपण'। आयुर्वेद का मूल वेद अथर्व

[Column 2] वेद। आयु के समानार्थक पर्याय। आयुर्वेद का लक्षण। आयु का लक्षण। आयुर्वेद की नित्यता आयुर्वेद के आठ अंग। आयुर्वेद के अधिकारी। वैद्य की परीक्षा। चरक तन्त्र के आठ स्थान उनके अध्यायों की पृथक् २ गणना और नाम से निर्देश। तन्त्रयुक्ति। ग्रन्थ संक्षेप। प्रतिवादी उपार्ता वैद्या- भास को पराजय करने का प्रकार। तन्त्रविज्ञों और गर्वीले वैद्यों के स्वरूप। उपसंहार। इति सूत्रस्थानम् ॥ निदानस्थानम् प्रथमोऽध्यायः (पृ० ४०८-४२१) ज्वरनिदानम्—निदान के पर्याय। रोग के तीन प्रकार—आग्नेय, सौम्य और वायव्य। निदानाष्टक अर्थात् रोग के पर्याय। पूर्वरूप लिंग उपशय, सम्प्राप्ति के लक्षण। सम्प्राप्ति के भेद। ज्वर निदान। ज्वर-दाह के लक्षण। पित्तज्वर सम्प्राप्ति भेद लक्षण। कफ- ज्वर सम्प्राप्ति और लक्षण। समंसर्ग व सांनिपातिक ज्वर। आगन्तुकज्वर सम्प्राप्ति-लक्षण। ज्वर-ज्वर के भेद ज्वर के पूर्वरूप ज्वर की उत्पत्ति ज्वर का परिणाम। ज्वर के चिकित्सासूत्र। जीर्ण ज्वर में घृतपान। संस्कार सिद्ध घृत-घृत की श्रेष्ठता। उपसंहार। द्वितीयोऽध्यायः (पृ० ४२१-४२८) रक्तपित्तनिदानम्—रक्तपित्त का लक्षण। पित्त प्रकोप से रक्त का दोष। लोहित पित्त वा रक्तपित्त नाम पड़ने