भारतकोश
चरक संहिता (प्रथम भाग: सूत्र, निदान, विमान, शारीर व इन्द्रिय स्थान)

चरक संहिता (प्रथम भाग: सूत्र, निदान, विमान, शारीर व इन्द्रिय स्थान)

Charaka Samhita Part 1 with Hindi Translation

महर्षि चरक व अग्निवेश द्वारा

स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished639 पृष्ठ

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२४४ चरकसंहिता [ अ० २१ को गीले वस्त्र से ढांपने की भांति प्रतीति, अंगों का टूटना, जाठराग्नि की क्षीणता, हृदय का कफ से लिप्त होना, सूजन, अरुचि, वमनेच्छा, पीनस, आधा सीसी, कोठ (बर्रें के काटे के भांति), फुन्सियां, खाज, तन्द्रा, आलस्य, कास, गले के रोग स्मृति नाश, बुद्धिनाश, मूर्च्छा, स्रोतों का अवरोध, ज्वर, इन्द्रियों में असमर्थता, विष के वेग का जोर (फिर से चढ़ना) ये लक्षण अहितकारी निद्रा अर्थात् दिन में सोने से उत्पन्न होते हैं। इसलिये बुद्धिमान् मनुष्य को चाहिये कि अहि- तकारी नींद का त्याग करे, और हितकारी नींद का सेवन करे इससे सुख होगा। रात्रि में जागने से शरीर में रूक्षता और दिन में सोने से स्निग्धता बढ़ती है। और बैठे-बैठे सोना न तो रूक्षता उत्पन्न करता है, न अभिष्यन्द अर्थात् स्निग्धता उत्पन्न करता है। शरीर के धारण के लिये जिस प्रकार भोजन सुखकारक होता है, उसी प्रकार नींद भी आवश्यक है। इसलिये स्थूलता और कृशता मुख्य रूप से आहार और निद्रा पर अवलम्बित है ॥ ४३-५१ ॥ अभ्यङ्गोत्सादनं स्नानं ग्राम्यानूपौदका रसाः । शाल्यन्नं सदधि क्षीरं स्नेहो मद्यं मनःसुखम् ॥ ५२ ॥ मनसोऽनुगुणा गन्धाः शब्दाः संवाहनानि च । चक्षुषस्तर्पणं लेपः शिरसो वदनस्य च ॥ ५३ ॥ स्वास्तीर्णं शयनं वेश्म सुखं कालस्तथांचितः । आनयन्त्यचिरान्निद्रां प्रनष्टा या निमित्ततः ॥ ५४ ॥ तैलमर्दन, उबटन, स्नान, ग्राम्य या जलचर प्राणियों का मांस रस, चावल, दही, दूध, स्नेह (घी-तैल) मद्य, मन की प्रिय वस्तुएं, मनोनुकूल सुगन्धि, शब्द और संवाहन (मसाज, मुट्ठी भरना), आँखों का तर्पण, शिर और मुख, शरीर पर चन्दनादि का लेप, अच्छा बिछा पलंग, सुन्दर घर तथा उचित समय ये वस्तुएं कारण से नष्ट हुई नींद को शीघ्र ही उत्पन्न कर देती हैं * ॥५२-५४॥ कायस्य शिरसश्चैव विरेकश्छर्दनं भयम् । चिन्ता क्रोधस्तथा धूमो व्यायाम रक्तमोक्षणम् ॥ ५५ ॥ उपवासोऽसुखा शय्या सत्त्वौदार्यं तमोजयः । निद्राप्रसङ्गमहितं वारयन्ति समुत्थितम् ॥ ५६ ॥

  • यदि मस्तिष्क में स्थित निद्रा को नियमित करने वाला केन्द्र नष्ट कर दिया जाय या चोट आदि से नष्ट हो जाय अथवा विक्षत हो जाय तो पुरुष को नींद का आना असम्भव हो जाता है। जब तक मस्तिष्क में यह केन्द्र ठीक है तभी तक यह चिकित्सा फलवती हो सकती है ।