चरक संहिता (प्रथम भाग: सूत्र, निदान, विमान, शारीर व इन्द्रिय स्थान)
Charaka Samhita Part 1 with Hindi Translation
महर्षि चरक व अग्निवेश द्वारा
स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें३५६ चरकसंहिता [ अ० २२ द्वाविंशतितमोऽध्यायः अथातो लङ्घनबृंहणीयमध्यायं व्याख्यास्यामः ॥१॥ इति ह स्माऽऽह भगवानात्रेयः ॥२॥ अब लंघनबृंहणीय अध्याय का व्याख्यान करेंगे जैसा भगवान् आत्रेय ने कहा था ॥ १-२ ॥ तपःस्वाध्यायनिरतानात्रेयः शिष्यसत्तमान् । षडग्निवेशप्रमुखानुक्तवान् परिचोदयन् ॥ ३ ॥ लङ्घनं बृंहणं काले रूक्षणं स्नेहनं तथा । स्वेदनं स्तम्भनं चैव जानीते यः स वै भिषक् ॥ ४ ॥ आत्रेय महर्षि तपश्चर्या और स्वाध्याय में मग्न हुए, अग्निवेश आदि प्रमुख एवं उत्तम छः शिष्यों के ज्ञान के लिये कहने लगे—जो लंघन, बृंहण, रूक्षण, स्नेहन, स्वेदन एवं स्तम्भन क्रियाओं के समय तथा विधि को जानता है, वही वैद्य है ॥ ३-४ ॥ तमुक्तवन्तमात्रेयमग्निवेश उवाच ह । भगवंल्लङ्घनं किंखिल्लङ्घनीयाश्च कीदृशाः ॥ ५ ॥ बृंहणं बृंहणीयाश्च रूक्षणीयाश्च रूक्षणम् । स्नेहनं स्नेहनीयाश्च स्वेदाः स्वेद्याश्च के मताः ॥ ६ ॥ स्तम्भनं स्तम्भनीयाश्च वक्तुमर्हसि तद् गुरो । लङ्घनप्रभृतीनां च षण्णामेषां समासतः ॥ ७ ॥ कृताकृतातिरिक्तानां लक्षणं वक्तुमर्हसि । इस प्रकार कहते हुए आत्रेय ऋषि से अग्निवेश ने कहा-कि भगवन् लंघन किस प्रकार का होता है और कौन पुरुष लंघन के योग्य हैं ? बृंहण क्या है और बृंहणीय चिकित्सा के योग्य कौन हैं ? रूक्षण क्या है और रूक्षणीय कौन हैं ? स्नेहन क्या है और स्नेहनीय कौन हैं ? स्वेदन क्या है और स्वेदनीय कौन हैं ? स्तम्भन क्या है और स्तम्भनीय पुरुष कौन हैं ? हे गुरो ! यह सब आप कहिये । इन छः लंघन आदि के लक्षण संक्षेप में कहिये । सम्यक् प्रकार से किये, न किये और अति किये हुए के लक्षण भी आप कहें ॥ ५-६ ॥ वचस्तदग्निवेशस्य निशम्य गुरुरब्रवीत् ॥ ८ ॥ यत्किञ्चिल्लाघवकरं देहे तल्लङ्घनं स्मृतम् । वृहत्त्वं यच्छरीरस्य जनयेत्तच्च बृंहणम् ॥ ६ ॥ रौक्ष्यं खरत्वं वैशद्यं यत्कुर्यात्तद्धि रूक्षणम् ।