भारतकोश
चरक संहिता (प्रथम भाग: सूत्र, निदान, विमान, शारीर व इन्द्रिय स्थान)

चरक संहिता (प्रथम भाग: सूत्र, निदान, विमान, शारीर व इन्द्रिय स्थान)

Charaka Samhita Part 1 with Hindi Translation

महर्षि चरक व अग्निवेश द्वारा

स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished639 पृष्ठ

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पृष्ठ 316

२६८ चरकसंहिता [ अ० २६ यात: शेषै: पृथग्योगं शेषैरम्लकडू तथा ॥ १८ ॥ युज्येते तु कषायेण सतिक्तौ लवणोषणौ । स्वादु और लवण के साथ कटु, तिक्त, कषाय के योग से तीन, और लवण को छोड़कर स्वादु, कटु, तिक्त, कषाय के योग से एक, इस प्रकार से दस भेद हुए । अब स्वादु (मधुर) रस के छोड़ने से (अम्ल, लवण इन का कटु, तिक्त, कषाय के साथ योग होने से) तीन, लवण के छोड़ने से अम्ल, कटु, तिक्त और कषाय के योग से एक और मधुर, अम्ल रस को छोड़ने से लवण, कटु, तिक्त, कषाय, यह एक भेद, इस प्रकार से पन्द्रह भेद बन जाते हैं। जैसे—(१) मधुराम्ललवणकटु, (२) मधुराम्ललवणतिक्त, (३) मधुराम्ल- लवणकषाय, (४) मधुराम्लकटुतिक्त, (५) मधुराम्लकटुकषाय, (६) मधुराम्ल- तिक्तकषाय, (७) मधुरलवणकटुतिक्त, (८) मधुरलवण तिक्तकषाय, (६) मधुरलवणकषायकटु, (१०) मधुरकटुतिक्तकषाय, (११) अम्ललवणकटुतिक्त, (१२) अम्ललवणतिक्तकषाय, (१३) अम्ललवण कषायकटु, (१४) अम्ल- कटुतिक्तकषाय, (१५) लवणकटुतिक्तकषाय ॥ १७-१८ ॥ षट् तु पञ्चरसान्याहुरेकैकस्यापवर्जनात् ॥ १९ ॥ षट् चैवैकरसानि स्युरेकं षड्समेव तु । इति त्रिषष्टिर्द्रव्याणां निर्दिष्टा रससंख्यया ॥ २० ॥ त्रिषष्टिः स्यात्त्वसंख्येया रसानुरसकल्पनात् । रसास्तरतमत्वाभ्यां तां संख्यामतिपतन्ति हि ॥ २१ ॥ संयोगाः सप्तपञ्चाशत्कल्पना तु त्रिषष्टिधा । रसानां तत्र योग्यत्वात्कल्पिता रसचिन्तकैः ॥ २२ ॥ एक एक रस के छोड़ने से छः रस बनते हैं, (यथा—मधुर को छोड़ने से अम्ल, लवण, तिक्त, कटु, कषाय; अम्ल को छोड़ने से स्वादु, लवण, कटु, तिक्त, कषाय, इसी प्रकार लवण, कटु, तिक्त, कषाय के छोड़ने से छः रस)। (१) अम्ललवणकटुतिक्तकषाय (२) मधुरलवणकटुतिक्तकषाय (३) मधुराम्लकटु- तिक्तकषाय (४) मधुराम्ललवणतिक्तकषाय (५) मधुराम्ललवणकटुकषाय (६) मधुराम्ललवणकटुतिक्त । एक एक रस के छः भेद (यथा—मधुर, अम्ल, आदि) और सब मिलित होने से एक भेद, इस प्रकार से कुल मिलाकर तिरसठ (६३) रस जाते हैं। ये जो तिरसठ (६३) प्रकार के रसों के भेद कहे हैं, इन में एवं अनुरस की कल्पना नहीं की गई है। और यदि रस और अनुरस मिला दें,