भारतकोश
चरक संहिता (प्रथम भाग: सूत्र, निदान, विमान, शारीर व इन्द्रिय स्थान)

चरक संहिता (प्रथम भाग: सूत्र, निदान, विमान, शारीर व इन्द्रिय स्थान)

Charaka Samhita Part 1 with Hindi Translation

महर्षि चरक व अग्निवेश द्वारा

स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished639 पृष्ठ

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३४४ चरकसंहिता [ अ० २७ जल्दी पच जाता है, बहुत अधिक दोषों को नहीं बढ़ाता। पारावत (कामरूप में प्रसिद्ध है) दो प्रकार का है। मधुर और अम्ल। इनमें मधुर शीतल और अम्ल, उष्ण गुरु, अरुचि और अग्नि की तीक्ष्णता को नाश करता है। काश्मरी ( गम्भारी ) का फल लगभग कमरख के फल के समान है, इसी प्रकार खट्टे फाळसे के समान तूद ( औत्तरपथिक शहतूत ) भी है। टंक का फल कषाय मधुर, वातल, गुरु और शीतल है। कच्चा कैथ कण्ठ ( स्वर ) को नाश करने वाला ( स्वर बिठानेवाला ), विषनाशक, आम का संग्राहक, वायुकारक है। पका हुआ कैथ मधुर-अम्लकषाय रस एवं सुगन्धित होने से खाने में रुचिकर और अच्छी तरह पक जाने पर दोषनाशक, विषनाशक, संग्राही और गुरु है। पका हुआ बेल पचने में दुर्जर, दोषकारक, बहुत दुर्गन्धयुक्त वायु पैदा करने वाला है। कच्चा बेल स्निग्ध, उष्ण, तीक्ष्ण, अग्निदीपक, कफ- वायुनाशक है। कच्चा आम (गुठली बैठने से पहिले) रक्तपित्तकारक, पित्तका- रक है। पकने पर आम वायुनाशक, मांस शुक्र और बलवर्द्धक है। पका हुआ जामुन कषाय मधुर रस, गुरु विष्टम्भी, शीतल, कफ-पित्तनाशक संग्राही और वायुकारक है। बेर-मधुर, स्निग्ध, रेचक, वात-पित्तनाशक है, सूखा बेर कफ-वातनाशक और पित्त के लिये अविरोधी है, पित्त का प्रकोप नहीं करता। सिञ्चितिका (सेव, सफरज़ंद) कषाय, मधुररस, शीतल, संग्राही है। गांगेरन ( नागबला ) और करीर (करौंदा), कन्दूरी, तोदन और धाय के फल मधुर-कषाय, शीतल, पित्त-कफनाशक हैं। पका हुआ कटहल, केला और राजादन ( खिरनी ) स्वादु, कषाय, स्निग्ध, शीतल, गुरु हैं। छबकी का फल ( हरफारेवड़ी ) कषाय और विशद एवं सुगन्धित होने से रुचिकर हृद्य, वायुकारक तथा अवदंशक्षम ( इस फलको खाकर दूसरे वस्तुओंमें रुचि होती) है, नीप ( कदम्ब ), शताह्व ( शरका ), पीलु, तृणधान्य ( केतकी फल ), विकङ्कत, प्राचीन आमलक, दोषनाशक और विषनाशक हैं। इंगुद (हिंगोट) का फल तिक्त मधुर स्निग्ध, उष्ण और कफवातनाशक है। तिन्दुक- फल ( तेन्दू ), कफ-पित्तनाशक कषाय, मधुर और लघु है। आंवले में लवण रस को छोड़कर और सब रस हैं और स्वेद मेद, कफ, उत्क्लेद (वमन की रुचि) और पित्त के रोगों को नष्ट करता है, रूक्ष, स्वादु, कषाय, अम्ल, कफ-पित्तना- शक है। विभीतक ( बहेड़ा ), रस, रक्त, मांस, मेदजन्य रोगों को नष्ट करती है स्वर भेद, कफ के उत्क्लेद, तथा पित्त रोग नाशक है। खट्टा अनार कषाय, मधुर, वातनाशक, संग्राही, अग्निदीपक, स्निग्ध और उष्ण है, तथा हृदय के